भारत के सबसे मशहूर इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक, IIT बॉम्बे अब सात समंदर पार अमेरिका में भी अपनी धाक जमाने जा रहा है. भारत और अमेरिका के बीच पढ़ाई-लिखाई के रिश्तों को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है. IIT बॉम्बे अमेरिका के न्यूयॉर्क में अपना पहला विदेशी सब-कैंपस खोलने जा रहा है. यह सब-कैंपस न्यूयॉर्क के स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क (SUNY) एट ओल्ड वेस्टबरी में स्थापित किया जाएगा. इस ऐतिहासिक साझेदारी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय और अमेरिकी छात्र मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंजीनियरिंग और नई टेक्नोलॉजी जैसे भविष्य के उभरते क्षेत्रों में पढ़ाई और रिसर्च कर सकेंगे.
2027 से शुरू हो सकती हैं क्लासेस
अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो इस नए सब-कैंपस में पहला एकेडमिक सेशन साल 2027 से शुरू हो जाएगा. इसकी आधिकारिक घोषणा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में हुई एक वर्चुअल मीटिंग में की गई. इस मीटिंग में IIT बॉम्बे के डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष केदारे और SUNY ओल्ड वेस्टबरी के प्रेसिडेंट टिमोथी ई. सैम ने एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर साइन किए.
I welcome the announcement of a Letter of Intent between @iitbombay and @SUNYOldWestbury to explore collaboration in engineering, multidisciplinary research, technology and other emerging areas of the future. I appreciate the virtual participation of Ambassador @AmbVMKwatra,… pic.twitter.com/VsS4Qg8N27
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) June 26, 2026
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस कदम की तारीफ करते हुए इसे दोनों देशों के बीच ज्ञान का जीवंत गलियारा बताया है. उन्होंने कहा कि इससे छात्रों और प्रोफेसर्स के लिए आगे बढ़ने के बेहतरीन मौके पैदा होंगे.
कैंपस में क्या होगा खास?
नए कोर्सदोनों संस्थान मिलकर विज्ञान और इंजीनियरिंग में अंडरग्रेजुएट (Graduation), पोस्टग्रेजुएट (Postgraduation) और रिसर्च लेवल के नए कोर्स शुरू करेंगे.
AI पर फोकसआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी पर खास ध्यान दिया जाएगा.
प्रोफेसर्स का आना-जानादोनों देशों के प्रोफेसर्स और रिसर्चर्स एक-दूसरे के कैंपस में जाकर छात्रों को पढ़ाएंगे और नए प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे.
जॉइंट सेमिनारविज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में मिलकर बड़ी कॉन्फ्रेंस और सेमिनार आयोजित किए जाएंगे. अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा और उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी ने भी इस साझेदारी को भारत-अमेरिका के इतिहास में "एक नया और गर्व का अध्याय" बताया है. अब भारतीय शिक्षा का डंका सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बजेगा.
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