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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का अनोखा कोर्स, छात्रों के दोस्त बन रहे पेड़; मिल रही है ये खास सीख

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी इंसान और पेड़ों को जोड़ने के ऐसा कोर्स करवा रही है, जो भागदौड़ भरी जिंदगी में बड़ा सुकून देने का काम कर रहा है.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का अनोखा कोर्स, छात्रों के दोस्त बन रहे पेड़; मिल रही है ये खास सीख
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का अनूठा कोर्स

पेड़-पौधों की इंसानों की जिंदगी में सिर्फ ऑक्सीजन देने की ही भूमिका नहीं होती, बल्कि अगर उनसे दोस्ती की जाए तो, जिंदगी और भी आसान बनाई जा सकती है. पेड़ों से मिल रहे ऑक्सीजन से हम जिंदा है और उनसे जुड़ने के बाद हमारा जीवन और भी आनंदमय हो सकता है. दरअसल, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने इंसान और पेड़ के बीच दोस्ती का एक कोर्स शुरू किया है, जिसका नाम है ट्री. एक तरफ दुनिया ने एआई जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी में प्रवेश कर लिया है. वहीं, यह यूनिवर्सिटी इंसान को भागदौड़ भरी जिंदगी में एक नया अनुभव दे रही है.

नेचर कोर्स का नेचर?

दरअसल पेड़ और इंसानी दोस्ती वाले इस नेचर कोर्स का वर्क नेचर भी बड़ा सिंपल है. इसमें ना कोई किताब, ना कोई क्लास है. क्योंकि यहां के प्रोफेसर पेड़ हैं. पेड़ और इंसान की दोस्ती वाले इस कोर्स को हार्वर्ड के अर्नोल्ड अरबोरिटम (ट्री म्यूजियम) के डायरेक्टर व डेवलपमेंट बायोलॉजिस्ट विलियम फ्रीमैन ने बनाया है.  

फ्रीमैन खुद को पारंपरिक अर्थ में प्रोफेसर नहीं मानते. फ्रीमैन की मानें तो उनके मुताबिक पेड़ ही छात्रों को सबसे गहरी सीख दे सकते हैं. पेड़ लोगों को धैर्य, जुड़ाव और मिल जुलकर रहने की सीख देते हैं. गौरतलब है कि हर साल इस कोर्स से कई छात्र जुड़ रहे हैं. इस क्लास के छात्रों को पहले ही दिन 281 एकड़ में फैले अरबोरिटम में लेकर जाती है. यहां तकरीबन 16 हजार पेड़ हैं, जिसमें हर छात्र को एक पेड़ चुनना होता है.

छात्रों ने शेयर किए अनुभव

हर छात्र पूरे सेमेस्टर अपने चुने हुए पेड़ के साथ टाइम बिताते हैं. छात्र द्वारा चुना हुआ पेड़ ही उसका वीकली असाइनमेंट और लास्ट प्रोजेक्ट होता है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक छात्र जैकब किफ्लू ने लिलैक का पेड़ चुना. इस छात्र का कहना है, मुझे एक ऐसा पेड़ चाहिए था, जो मुझे घर जैसा एहसास दिलाए. हो सकता है कि लोगों के लिए यह सुंदर नहीं है, लेकिन इसके नीचे बैठकर जो सुकून मिलता है, वो दुनिया के किसी भी कोने में नहीं है. एक और छात्र ने जापानी मेपल पेड़ चुना.

स्टेला कहती हैं, मैं इस कॉलेज में तीन महीने से हूं, मेरे यहां कई दोस्त हैं, लेकिन सबसे गहरा रिश्ता मेरा इस पेड़ से हैं. इस कोर्स के जनक फ्रीमैन कहते हैं, इस कोर्स की एक लाइन इसका पूरा सार है. वो लाइन है, इस पेड़ को महज अपना विस्तार ना समझें. उसे एक जीव की तरह समझें और उसकी फीलिंग्स जानने के लिए जुनूनी हो जाएं'. 

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