Engineering vs MBBS Fees: 12वीं के बाद हर स्टूडेंट और पेरेंट्स के सामने एक ही सवाल खड़ा होता है, इंजीनियरिंग करें या MBBS? दोनों ही फील्ड इज्जत और पैसे के मामले में टॉप पर हैं, लेकिन जब बात फीस और खर्च की आती है, तो कहानी अलग नजर आती है. अगर आप या आपके घर का कोई बच्चा इन दोनों में से कोई भी फील्ड चुन रहा और उसमें करियर बनाना चाहता है, तो इस आर्टिकल में जानिए दोनों कोर्स में कितना पैसा लगता है और ज्यादा महंगा है और आगे चलकर कमाई का पैटर्न कैसा रहता है.
इंजीनियरिंग की फीस सरकारी कॉलेज में कितनी है
अगर आपको जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced) क्लियर करके IIT मिल जाए, तो जनरल, OBC और NCL कैटेगरी के छात्रों के लिए 4 साल की हॉस्टल समेत पूरी बीटेक फीस करीब 8.65 लाख से 13.43 लाख रुपए तक रहती है. यानी 4 साल में औसतन 8 से 10 लाख रुपए तक इंजीनियरिंग की पढ़ाई में लग जाते हैं. NIT की बात करें तो और भी सस्ता पड़ता है. NIT में 4 साल की बीटेक फीस 5-6 लाख रुपए तक रहती है. अगर परिवार की सालाना इनकम 1 लाख से कम है, तो IIT और NIT दोनों में स्टूडेंट्स की पूरी ट्यूशन फीस माफ भी हो सकती है.
प्राइवेट कॉलेजों में इंजीनियरिंग की फीस
टियर-3 प्राइवेट कॉलेज खासकर यूपी, बंगाल और तमिलनाडु में 45,000 से 60,00 सालाना तक लगते हैं. सामान्य प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में 2 लाख से 5 लाख सालाना तक चले जाते हैं. जबकि प्रीमियम प्राइवेट यूनिवर्सिटी जैसे BITS पिलानी जैसे कॉलेजों में 4 साल की पूरी फीस 18 लाख से 22 लाख तक पहुंच सकती हैं. कुल मिलाकर सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में 4 साल की पढ़ाई 4-10 लाख में पूरी हो जाती है, जबकि प्राइवेट में ये 8 लाख से 22 लाख तक जा सकती है.
MBBS की फीस सरकारी कॉलेज में कितनी है
एमबीबीएस में सरकारी कॉलेज की फीस हैरान करने वाली है. दिल्ली में DU से जुड़े MAMC, LHMC जैसे सरकारी कॉलेजों में सालाना फीस सिर्फ 1,360 रुपए से शुरू होती है. महाराष्ट्र में ओपन कैटेगरी के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज की फीस करीब 1.62 लाख रुपए सालाना है. SC, ST, VJ-NT कैटेगरी के छात्रों को पूरी तरह फीस माफी मिलती है.
MBBS की फीस प्राइवेट कॉलेज में कितनी है
डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए जैसे ही आप प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की तरफ जाते हैं, तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है. सामान्य प्राइवेट कॉलेज की सालाना फीस 7 लाख से 30 लाख या उससे भी ज्यादा जा सकती है. मैनेजमेंट कोटा सीट पर एडमिशन लेने पर 15 लाख से 28 लाख तक सालाना खर्च आता है. कुछ डीम्ड यूनिवर्सिटी में फीस 30 लाख तक पहुंच जाती है. पूरे 5.5 साल के कोर्स का कुल खर्च 40 लाख से 1.5 करोड़ तक पहुंचता है, जो राज्य, कॉलेज और कोटा कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग होता है.
हॉस्टल, मेस, सिक्योरिटी डिपॉजिट जोड़ने के बाद सालाना खर्च 12 लाख से 30 लाख तक पहुंच सकता है. यानी अगर आपका NEET स्कोर सरकारी सीट दिलाने लायक नहीं है और आपको प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेना पड़े, तो पूरा MBBS कोर्स काफी महंगा पड़ता है.
MBBS की पढ़ाई में इस बात का भी रखें ध्यान
कई राज्यों में सरकारी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करने वाले छात्रों को एक सर्विस बॉन्ड साइन करना पड़ता है, जिसमें ग्रेजुएशन के बाद 1-2 साल ग्रामीण इलाके में सर्विस देनी होती है और अगर आप ये बॉन्ड तोड़ते हैं, तो महाराष्ट्र या राजस्थान जैसे राज्यों में 10 लाख से 25 लाख रुपए तक पेनल्टी देनी पड़ सकती है. ये बात ज्यादातर स्टूडेंट्स को एडमिशन के समय नहीं पता होती है.
इंजीनियरिंग और MBBS के बाद कमाई कितनी होती है
एक फ्रेश इंजीनियर सर्विस कंपनियों जैसे TCS और इंफोसिस में 3-5 से लेकर 6 लाख रुपए सालाना से शुरुआत करता है, जबकि प्रोडक्ट कंपनियों और MNC में फ्रेशर्स को 8-25 लाख सालाना तक मिल जाता है. यानी ग्रेजुएशन के तुरंत बाद कमाई शुरू हो जाती है. मौजूदा समय में MBBS ग्रेजुएट को शुरुआती 1-3 साल में 4-8 लाख रुपए सालाना मिलता है. सरकारी अस्पताल में ग्रामीण पोस्टिंग पर ये सिर्फ 25,000-40,000 रुपए महीना भी हो सकता है. लेकिन MD या MS और स्पेशलाइजेशन के बाद कमाई बढ़ जाती है. प्राइवेट हॉस्पिटल में एक MD या MS डॉक्टर 5-7 साल के एक्सपीरिएंस पर 12-25 लाख सालाना कमाता है.
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