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This Article is From Sep 19, 2025

DUSU अध्यक्ष बनने के बाद क्या-क्या पावर मिलती हैं? जानें कितना मिलता है पैसा

DUSU Election: दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में तमाम संगठनों ने ताल ठोकी थी, इसे लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं और प्रचार हो रहा था.

DUSU अध्यक्ष बनने के बाद क्या-क्या पावर मिलती हैं? जानें कितना मिलता है पैसा
DUSU चुनाव में तमाम संगठनों ने ठोकी ताल

दिल्ली यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट यूनियन यानी DUSU चुनाव के नतीजे कुछ ही देर में सामने आ रहे हैं. पिछले कई दिनों से इसे लेकर तैयारियां चल रही थीं और तमाम छात्र दल प्रचार में जुटे थे. दिल्ली यूनिवर्सिटी के इस चुनाव में खूब पैसा खर्च होता है और उम्मीदवार किसी भी हाल में जीतने की कोशिश करते हैं. इस बार अध्यक्ष पद के लिए टक्कर ABVP के आर्यन मान, NSUI की जोसलिन नंदिता चौधरी और SFI-AISA की अंजलि के बीच है. आइए जानते हैं कि DUSU प्रेसिडेंट की क्या पावर होती हैं और इन्हें कुल कितना बजट दिया जाता है. 

कैसे होता है DUSU चुनाव?

हर साल दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के चुनाव कराए जाते हैं, जिसमें तमाम छात्र संगठन अपना दावा ठोकते हैं. इसे लेकर दिल्ली यूनिवर्सिटी की तरफ से खास इंतजाम किए जाते हैं और पोलिंग बूथ बनता है. दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले तमाम छात्र अपना वोट डालते हैं और फिर काउंटिंग के बाद नतीजे सामने आते हैं. 

कितना होता है कार्यकाल?

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के पदाधिकारियों का कार्यकाल कुल 11 महीने का होता है और 12वें महीने में चुनाव कराए जाते हैं. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद पर छात्र संगठन अपने उम्मीदवार खड़े करते हैं. जिस संगठन  का अध्यक्ष होता है, उसे सबसे ताकतवर माना जाता है. यानी वही यूनिवर्सिटी के तमाम कामकाज देखता है. 

क्या होती हैं पावर?

डूसू अध्यक्ष की पावर की बात करें तो ये काफी अहम पद होता है. इस पद पर जीत दर्ज करने वाले को अलग ऑफिस दिया जाता है और वो प्रशासन के तमाम फैसलों में हिस्सेदार भी होता है. जिन फैसलों पर अध्यक्ष को आपत्ति होती है, उन्हें लेकर वो विरोध करते हैं. यूनिवर्सिटी से जुड़ी तमाम समस्याओं को  हजारों छात्रों का नेतृत्व करने वाले प्रेसिडेंट को राजनीतिक तौर पर भी काफी अहमियत मिलती है और यहां से उनके लिए पॉलिटिक्स के दरवाजे भी खुलते हैं. 

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कितना होता है कुल बजट?

दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट को कोई सैलरी नहीं मिलती है. जीतने वाले संगठन को कुल 20 लाख रुपये का बजट दिया जाता है, जिसे कल्चरल एक्टिविटीज, इवेंट और रिसर्च पर खर्च किया जाता है. DUSU प्रेसिडेंट रौनक खत्री ने एक इंटरव्यू में बताया था कि डूसू के चारों पदाधिकारियों को पांच-पांच लाख रुपये दिए जाते हैं, ये पैसा उनके अकाउंट में नहीं होता है. इसके लिए एक कमेटी बनती है और बताना होता है कि किस चीज में कितना पैसा खर्च हो रहा है.   

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