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बकरीद के मौके पर दिल्ली यूनिवर्सिटी का एग्जाम, छात्र ने हाईकोर्ट में लगाई गुहार

दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र ने बकरीद के मौके पर परीक्षा कराए जाने का विरोध किया है और इस मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंच गया है. बकरीद की छुट्टी में बदलाव किया गया है, इससे पहले 27 मई को छुट्टी थी, लेकिन अब इसे बदलकर 28 मई किया गया है.

बकरीद के मौके पर दिल्ली यूनिवर्सिटी का एग्जाम, छात्र ने हाईकोर्ट में लगाई गुहार
दिल्ली यूनिवर्सिटी में 28 मई से परीक्षा आयोजित की जाएगी

दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ के छात्र ने 28 मई को परीक्षा आयोजित करने के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. उसने याचिका में कहा है कि जब ईद-उल-ज़ुहा (बकरीद) का त्योहार 28 मई को मनाया जाएगा तो फिर परीक्षा कैसे दे सकते हैं, इसे मुस्लिम छात्रों के धार्मिक आधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा. वही केंद्र सरकार की तरफ से ईद-उल-ज़ुहा (बकरीद) की छुट्टी को आधिकारिक तौर पर 28 मई को घोषित किया गया है, ऐसे में परीक्षा कैसे कराई जा सकती है. वहीं याचिका में अनुच्छेद 14,21,25 और 29 की बात की गई है.

छात्र ने याचिका में क्या लिखा 

यह रिट याचिका दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय में एकीकृत विधि पाठ्यक्रम (छठे सेमेस्टर) के एक छात्र ने दायर की है. याचिका में कहा गया है कि यूनिवर्सिटी के मनमाने तरीके से मुस्लिम समुदाय के छात्र परेशान हैं और त्योहार के मौके पर एग्जाम लेना ठीक नहीं है. इसमें कहा गया है कि भारत सरकार की तरफ से भी ईद-उल-जुहा (बकरीद) की छुट्टी को आधिकारिक रूप से 27 मई से  28 मई कर दिया गया है, इसके बावजूद दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 28 मई को निर्धारित परीक्षा जारी रखने का फैसला लिया है.

बकरीद की छुट्टी कब है

केंद्र सरकार ने पहले ईद-उल-ज़ुहा (बकरीद) की छुट्टी 27 मई को घोषित किया गया था, बाद में चांद दिखने की जानकारी के अनुसार इसमें संशोधन करते हुए इस अवकाश को 28 मई कर दिया गया है. अब छुट्टी बदलने के बावजूद अब 28 मई को होने वाली परीक्षाएं अपने निर्धारित समय पर ही होंगी. पहले 27 को ही ये परीक्षा होनी थी, लेकिन बकरीद की छुट्टी के चलते इसे 28 मई को शिफ्ट कर दिया गया था. हालांकि अब तारीख बदलने के बाद परीक्षा को एक बार फिर आगे बढ़ाए जाने की मांग हो रही है. 

आर्टिकल 14,21,25, और 29 में ऐसा क्या है

  • अनुच्छेद 14: समानता का अधिकार कानून के समक्ष समानता- यह सुनिश्चित करता है कि भारत के राज्य क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा.
  • अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार गरिमापूर्ण जीवन- यह सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों में से एक है, जो किसी भी व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है.
  • अनुच्छेद 25: धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकारअंत- करण की स्वतंत्रता- इसके तहत कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को मानने, उसका आचरण करने और उसका स्वतंत्र रूप से प्रचार करने के लिए पूरी तरह आजाद है.
  • अनुच्छेद 29: सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण- यह अनुच्छेद भारत के किसी भी हिस्से में रहने वाले नागरिकों के किसी भी वर्ग को अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति को सुरक्षित रखने और संरक्षित करने का अधिकार देता है अल्पसंख्यकों के लिए अलग से शैक्षणिक अधिकार की बात की गई है. 

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