आज की 'जेनजी' पीढ़ी एकदम अलग सोच रखती है और ये सोच पढ़ाई में भी दिख रही है. एक समय था जब सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को सदाबहार माना जाता था. हर घर में कोई न कोई ये कोर्स जरूर करता था. लेकिन अब समय बदल गया है और 'जेनजी' इन कोर्सों में कम रुचि ले रहे हैं. नए साल 2026 में वर्षों से सुपरहिट रहे कोर्सेज की डिमांड कम होती नजर आएगी. सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्रों की डिमांड धीरे-धीरे गिर रही है. क्योंकि आज के बच्चों का झुकाव अब कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल मार्केटिंग जैसी फील्ड्स की और ज्यादा है.
इंजीनियरिंग के अलावा बीए और बीकॉम जैसे कोर्सेज भी अब उतने आकर्षक नहीं रहे हैं. 'जेनजी' पीढ़ी थ्योरी पसंद नहीं कर रही है. उनका फोकस कुछ अलग करने की और है. जैसे की डिजिटल मार्केटिंग और फाइनेंशियल एनालिटिक्स जैसे कोर्स उन्हें ज्यादा पसंद आ रहे हैं. इतना ही नहीं टीचर ट्रेनिंग और शिक्षा से जुड़े कोर्सेज में भी उत्साह घटा है. इसका मुख्य कारण भर्ती प्रक्रिया में देरी और निजी स्कूलों में कम सैलरी हैं. युवा अब टीचिंग की जगह एड-टेक, कंटेंट क्रिएशन और कॉर्पोरेट ट्रेनिंग की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां उन्हें बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस और पैकेज मिलता है.
डिजिटल का युग
आनेवाला समय डिजिटल युग होने वाला है. ऐसे में हर कोई डिजिटल से जुड़े कोर्स करने में रुचि रख रहा है. आधुनिक तकनीक के हिसाब से अपडेट कर रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कोर्स कर रहा है. कंपनियां भी अब डिग्री के बजाय स्किल्स को ज्यादा महत्व दे रही हैं.
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युवा 9 से 5 की नौकरी से हटकर रिमोट और फ्रीलांसिंग पसंद कर रहे हैं. 2026 में यह बदलाव सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि शिक्षा जगत की बड़ी करवट है. छात्र अब वही कोर्सेज चुनेंगे जो उन्हें फ्यूचर-रेडी और जॉब-रेडी बनाएंगे। जो कोर्सेज सिर्फ किताबी ज्ञान देंगे, उनकी चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ जाएगी.
आईएएनएस इनपुट के साथ
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