विज्ञापन

कोटा में बोले री-नीट देने पहुंचे छात्र: 'तैयारी की लय टूटी, अब आगे का फैसला परिवार की राय से होगा'

री-नीट परीक्षा देने पहुंचे रिपीटर छात्रों के चेहरों पर इस बार उत्साह से ज्यादा थकान, असमंजस और निराशा नजर आई. परीक्षा रद्द होने और दोबारा पेपर देने की मजबूरी ने अच्छे नंबर लाने वाले छात्रों को भी गंभीर मानसिक और पारिवारिक दबाव में डाल दिया है.

कोटा में बोले री-नीट देने पहुंचे छात्र: 'तैयारी की लय टूटी, अब आगे का फैसला परिवार की राय से होगा'
झालावाड़ जिले के खानपुर क्षेत्र के केवलदा गांव निवासी आदर्श धाकड़ का यह छठा प्रयास है.

Re neet exam 2026 : री-नीट परीक्षा देने पहुंचे परीक्षार्थियों, खासकर रिपीटर स्टूडेंट्स के चेहरों पर इस बार उत्साह से ज्यादा थकान, असमंजस और निराशा नजर आई. जिन छात्रों के कैंसिल हुई परीक्षा में अच्छे नंबर आए थे, वे भी दोबारा परीक्षा की मजबूरी से मानसिक दबाव में दिखे. कई छात्रों ने माना कि री-नीट की तैयारी पहले जैसी लय में नहीं हो पाई, तो कुछ ने साफ कहा कि अब आगे का फैसला परिवार की राय से ही होगा. वहीं कुछ छात्र अब स्टेट लेवल प्रतियोगी परीक्षाओं और दूसरे विकल्पों पर ध्यान देने की बात भी कर रहे हैं.

575 नंबर आने के बाद टूटा कॉन्फिडेंस, अब परिवार करेगा फैसला

अयोध्या निवासी रितिक मिश्रा दूसरी बार नीट दे रहे हैं. कैंसिल हुई परीक्षा में उनके 575 अंक आए थे. रितिक बताते हैं कि परीक्षा रद्द होने के बाद उन्हें फिर से नोट्स निकालने, व्यवस्थित करने और पढ़ाई की रफ्तार पकड़ने में काफी दिक्कत हुई. उन्होंने कहा कि पहले वाले नोट्स तो छोड़ दिए थे, लेकिन री-नीट के बाद फिर से सब संभालना पड़ा.

रितिक के मुताबिक, कैंसिलेशन के बाद वे पहले जैसी पढ़ाई नहीं कर पाए. टेस्ट में कम नंबर आने लगे तो कॉन्फिडेंस भी गिर गया. अब उनका कहना है कि इस तीसरे पेपर के बाद आगे क्या करना है, यह परिवार ही तय करेगा. किसान परिवार से आने वाले रितिक ने कहा कि मेहनत तो पूरी की, लेकिन अब हिम्मत पहले जैसी नहीं बची है. अगर इस बार चयन हो गया तो ठीक, वरना घरवाले जो कहेंगे, उसी दिशा में आगे बढ़ेंगे.

छठा प्रयास दे रहे आदर्श धाकड़, 635 नंबर के बाद भी अनिश्चितता बरकरार

झालावाड़ जिले के खानपुर क्षेत्र के केवलदा गांव निवासी आदर्श धाकड़ का यह छठा प्रयास है. कैंसिल हुई नीट परीक्षा में उनके 635 अंक आए थे. आदर्श बताते हैं कि वे लगातार कई वर्षों से परीक्षा दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि 2021 में 12वीं के साथ परीक्षा दी, फिर 2022 और 2023 में भी प्रयास किया. 2024 में 651 अंक आए, जो अब तक उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा, लेकिन काउंसलिंग में गड़बड़ी के चलते उन्हें राहत नहीं मिली. इस मामले में वे कोर्ट भी गए, लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली,, इसके बाद 2025 में 454 और 2026 की कैंसिल हुई परीक्षा में 635 अंक आए. आदर्श का कहना है कि पिछले एक महीने में उन्होंने खूब रिवीजन किया है, लेकिन अब सब कुछ रिजल्ट पर निर्भर करेगा. उनके पिता राजेंद्र पटवारी भी बेटे के साथ खड़े हैं और उनका कहना है कि वे पूरा प्रयास करेंगे, लेकिन जरूरत पड़ी तो अन्य विकल्प भी खुले रखे जाएंगे.

कोचिंग, रिवीजन और फिर भी अनिश्चित भविष्य-बृजेश बोले अब दूसरे विकल्प भी देखेंगे

भीलवाड़ा के बृजेश कोटा में रहकर कोचिंग कर रहे हैं. उनका यह चौथा प्रयास है. पिछली परीक्षा में उनके 602 अंक आए थे और उन्हें उम्मीद थी कि चयन की संभावना बन सकती थी. लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद हालात बदल गए. बृजेश ने बताया कि री-नीट के लिए उन्होंने रिवीजन किया, प्रैक्टिस क्वेश्चन लगाए, लेकिन अब वे सिर्फ नीट पर निर्भर नहीं रहना चाहते. उन्होंने लैब असिस्टेंट भर्ती परीक्षा भी दी है, जिसमें संभावनाएं बनती दिख रही हैं. किसान परिवार से आने वाले बृजेश का कहना है कि परीक्षा कैंसिल होने से काफी दुख हुआ और अब जरूरत पड़ी तो दूसरे विकल्पों की ओर बढ़ेंगे.

दो साल से कोटा में तैयारी कर रहे आकिब, बोले- कुछ दिन टूट गए थे, फिर खुद को संभाला

बिहार के आकिब का यह तीसरा प्रयास है. वे पिछले दो साल से कोटा में रहकर नीट की तैयारी कर रहे हैं. आकिब ने बताया कि परीक्षा रद्द होने के बाद कुछ दिन वे काफी निराश रहे, लेकिन बाद में फिर खुद को संभालते हुए पढ़ाई शुरू की और दोबारा रिदम में लौटने की कोशिश की,, हालांकि, उनका कहना है कि अब भी यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि रिजल्ट कैसा रहेगा. साथ ही उन्हें लगता है कि री-नीट का पेपर कठिन आने की संभावना ज्यादा है, जिससे दबाव और बढ़ गया है.

कम नंबर की उम्मीद, इसलिए अब स्टेट प्रतियोगिता पर नजर

कोटा के छावनी क्षेत्र निवासी उमेश राठौर का यह तीसरा प्रयास है. उमेश ने बताया कि कैंसिल हुई परीक्षा में उनके नंबर ज्यादा अच्छे नहीं आ रहे थे, इसलिए वे एक बार फिर कोशिश कर रहे हैं. सब्जी का काम करने वाले परिवार से आने वाले उमेश का कहना है कि अगर इस बार चयन हो गया तो ठीक, अन्यथा वे अब स्टेट लेवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर ध्यान देंगे. उमेश जैसे कई छात्रों के लिए री-नीट सिर्फ एक और परीक्षा नहीं, बल्कि करियर के अगले रास्ते का निर्णायक मोड़ बन गई है.

री-नीट ने सिर्फ परीक्षा नहीं, मानसिक संतुलन भी लिया

री-नीट देने पहुंचे इन छात्रों की बातचीत से साफ है कि यह परीक्षा सिर्फ एक अकादमिक प्रक्रिया नहीं रह गई, बल्कि मानसिक, पारिवारिक और आर्थिक दबाव का बड़ा कारण बन चुकी है. खासतौर पर रिपीटर स्टूडेंट्स के लिए यह स्थिति ज्यादा कठिन है, क्योंकि वे पहले से कई वर्षों की तैयारी, असफलताओं, उम्मीदों और परिवार की अपेक्षाओं का बोझ लेकर चल रहे हैं. जिन छात्रों के पहले अच्छे नंबर आए थे, उनमें भी यह डर दिखा कि दोबारा उसी स्तर की तैयारी कर पाना आसान नहीं था. वहीं जिनके नंबर कम आने की उम्मीद थी, उन्होंने इस री-नीट को आखिरी मौका मानते हुए अब दूसरे विकल्पों की ओर देखने की बात कही.

परिवार, आर्थिक स्थिति और भविष्य-तीनों के बीच फंसा छात्र

इन छात्रों की कहानियों में एक समानता साफ दिखी,, री-नीट ने सिर्फ तैयारी नहीं बिगाड़ी, बल्कि आत्मविश्वास भी प्रभावित किया. कोई किसान परिवार से है, कोई छोटे शहर से कोटा आकर सालों से तैयारी कर रहा है, कोई छह बार प्रयास कर चुका है, तो कोई अब वैकल्पिक नौकरी या स्टेट एग्जाम की तरफ देख रहा है. कई छात्रों ने माना कि अब फैसला सिर्फ उनका नहीं, परिवार का भी होगा, क्योंकि हर प्रयास के साथ आर्थिक और मानसिक निवेश बढ़ता जाता है. ऐसे में री-नीट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि परीक्षा रद्द होने का असर सिर्फ सिस्टम पर नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों पर भी पड़ता है जो अपनी उम्र, मेहनत और उम्मीदें दांव पर लगाकर बैठे होते हैं.

रीनीट परीक्षा देने पहुंचे रिपीटर स्टूडेंट्स के चेहरों पर इस बार उम्मीद से ज्यादा तनाव और निराशा दिखाई दी. जिन छात्रों के कैंसिल हुई परीक्षा में अच्छे नंबर आए थे, वे भी दोबारा परीक्षा की मजबूरी से परेशान नजर आए. किसी ने कहा कि अब आगे का फैसला परिवार करेगा, तो किसी ने साफ कहा कि अगर इस बार बात नहीं बनी तो स्टेट प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करेंगे. कोटा में परीक्षार्थियों से बातचीत में सामने आई यह तस्वीर बताती है कि रीनीट ने सिर्फ परीक्षा नहीं, बल्कि छात्रों का आत्मविश्वास भी प्रभावित किया है.

यह भी पढ़ें- हाथों में हथकड़ी, चेहरे पर उम्मीद: सीतामढ़ी जेल से NEET का एग्जाम देने पहुंचा ये कैदी, देखकर सब रह गए हैरान

लेखक के बारे में
img
शाकिर अली
संवाददाता, कोटा
शाकिर अली को टीवी जर्नलिज्म में 23 वर्षों का अनुभव है. NDTV में कोटा संभाग के ब्यूरो चीफ हैं.  राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, अपराध सहित अन्य मुद्दों को कव... और पढ़ें
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com