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CUET Result 2026: 'टाई-ब्रेकर रूल' क्या है? जब दो छात्रों के आ जाएं बराबर नंबर, तो किसे मिलती है पहली सीट?

CUET में जब दो या उससे अधिक उम्मीदवारों का स्कोर एक जैसा होता है और वे एक ही कोर्स और कॉलेज में दाखिले लेने के लिए अप्लाई करते हैं. तो ऐसी स्थिति में टाई-ब्रेकर रूल लागू किया जाता है. जिसके आधार पर ये तय किया जाता है कि सीट किस उम्मीदवार को दी जाएगी.

CUET Result 2026: 'टाई-ब्रेकर रूल' क्या है? जब दो छात्रों के आ जाएं बराबर नंबर, तो किसे मिलती है पहली सीट?
CUET UG 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद अब काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होगी.

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट) एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है जिसके जरिए देश के प्रमुख कॉलेजों में दाखिला मिलने का रास्ता खुलता है. इस परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) करवाती है.  CUET UG 2026 का रिजल्ट 23 जून को जारी कर दिया गया है. रिजल्ट जारी होने के बाद अब काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू होने वाली है. जून के आखिरी हफ्ते में ये प्रक्रिया शुरू हो सकती है. CUET UG स्कोर के जरिए दाखिला देने वाले सभी विश्वविद्यालयों जैसे DU, BHU, JNU ऑनलाइन काउंसलिंग पोर्टल को जल्द ही लाइव कर दें. जिसके बाद छात्र काउंसलिंग के लिए आवेदन कर सकेंगे. CUET UG स्कोर के आधार पर यूनिवर्सिटी मेरिट लिस्ट जारी करेगी, जिन छात्रों के नाम मेरिट लिस्ट में होंगे उनको दाखिला मिल जाएगा.

हालांकि कई बार ऐसे भी देखने को मिलता है कि सीट आवंटन प्रक्रिया में दो या दो से अधिक छात्रों के कुल नॉर्मलाइज्ड स्कोर बिल्कुल बराबर होते हैं. ऐसे में पहली सीट किसे मिलेगी यह तय करने के लिए 'टाई-ब्रेकर रूल' का इस्तेमाल किया जाता है. आखिर 'टाई-ब्रेकर रूल' क्या होता है. आइए जानते हैं, इसके बारे में.

'टाई-ब्रेकर रूल' क्या है

अगर मेरिट सूची बनाते समय दो छात्रों के नॉर्मलाइज्ड स्कोर बराबर होते हैं, तो 'टाई-ब्रेकर रूल' की मदद ली जाती है. इसके तहत दोनों छात्रों के 12वीं बोर्ड एग्जाम के बेस्ट 3 सब्जेक्ट के कुल प्रतिशत देखे जाते हैं. जिसका प्रतिशत ज्यादा होता है. उसे सीट दी जाती है. वहीं दोनों के बेस्ट 3 सब्जेक्ट के कुल प्रतिशत अगर बराबर निकलते हैं, तो 12वीं के बेस्ट 4  सब्जेक्ट के कुल प्रतिशत देखे जाते हैं. जिसका ज्यादा प्रतिशत होता है, उसे सीट दे दी जाती है. वहीं इस दौरान भी अगर बराबर अंक आते हैं, तो 12वीं के बेस्ट 5 सब्जेक्ट के कुल प्रतिशत देखे जाते हैं. अगर इस फेज में ही बराबर अंक होते हैं, तो आखिरी में उम्र को आधार पर सीट दी जाती है. जिस उम्मीदवार की आयु अधिक होती है उसे सीट पहले अलॉट की जाती है.

हालांकि आप इस बात का ध्यान रखें कि हर यूनिवर्सिटी के अपने टाई-ब्रेकिंग के नियम होते हैं. इसलिए जिस भी यूनिवर्सिटी के काउंसलिंग पोर्टल पर जाकर आप आवेदन करें, एक बार उनके नियम अच्छे से पढ़ लें.  वैसे तो कक्षा 12वीं के नंबरों को ही हर जगह टाई-ब्रेकर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. 

काउंसलिंग का फॉर्म भरते हुए हर एक जानकारी सही से भरें. काउंसलिंग रजिस्ट्रेशन के समय बोर्ड परीक्षाओं के नंबर बिल्कुल सटीक भरें. ताकि आगे जाकर किसी भी तरह की कोई दिक्कत आपको न हो.

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