क्लास 8 की सोशल साइंस टेक्स्ट बुक को लेकर उठे विवाद के बीच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किताब बनाने वाली टीम में एक वकील शामिल था, लेकिन छपने से पहले किसी बाहरी लीगल एक्सपर्ट से अलग से जांच नहीं कराई गई थी. उनका कहना है कि नियमों में ऐसी कोई मजबूरी नहीं है कि हर ऐसे चैप्टर को अलग से लीगल एक्सपर्ट से चेक करवाया जाए.
किस चैप्टर पर विवाद?
यह किताब NCERT ने तैयार की थी. विवाद “हमारे समाज में ज्यूडिशियरी की भूमिका” नाम के चैप्टर को लेकर हुआ. इस हिस्से में अदालतों के सामने आने वाली दिक्कतों, जैसे भ्रष्टाचार और केस पेंडिंग रहने,का जिक्र किया गया था. कुछ लोगों को लगा कि ऐसे विषय पर लिखने से पहले कानून के जानकारों से अलग से राय लेनी चाहिए थी.
एक अधिकारी ने कहा, “जिस टीम ने यह चैप्टर लिखा, उसमें एक वकील था. लेकिन किताब को रिव्यू करने के लिए लीगल फ्रेटरनिटी से कोई अलग पैनल नहीं था.” उन्होंने यह भी कहा कि किताब बनाने का जो तय प्रोसेस है, उसमें अलग से लीगल जांच का कोई नियम नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मामला बढ़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और किताब पर रोक लगा दी. साथ ही सभी छपी और डिजिटल कॉपी जब्त करने का आदेश दिया. इसके बाद NCERT ने माफी मांगी और किताब का डिस्ट्रीब्यूशन रोक दिया.
क्या था पूरा मामला?
पूरा विवाद उस चैप्टर के कंटेंट को लेकर शुरू हुआ, जिसमें न्यायपालिका के सामने भ्रष्टाचार और केस पेंडेंसी जैसी चुनौतियों का जिक्र किया गया था. चैप्टर में स्टूडेंट्स से सवाल पूछा गया था कि अगर सरकारी संस्थाएं नागरिकों की सेवा के लिए हैं, तो रिश्वत और करप्शन की खबरें क्यों सुनने को मिलती हैं. इसी को लेकर आपत्ति उठी, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और किताब को वापस लेना पड़ा.
NCERT की किताबें कैसे छपती हैं, कौन लिखता है चैप्टर? विवाद के बीच जानें हर सवाल का जवाब
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