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कम बारिश और 'एल नीनो' के डर से Rajasthan University का बड़ा फैसला, 14 अगस्त तक ऑनलाइन मोड में चलेंगी क्लासेस

Rajasthan Central University water crisis : राजस्थान सेंट्रल यूनिवर्सिटी (CURAJ) में कम बारिश और एल नीनो की आशंका के चलते 15 जुलाई से 14 अगस्त तक सभी क्लास ऑनलाइन चलेंगी. जानिए पानी की बचत के लिए यूनिवर्सिटी ने क्या गाइडलाइंस जारी की हैं.

कम बारिश और 'एल नीनो' के डर से Rajasthan University का बड़ा फैसला, 14 अगस्त तक ऑनलाइन मोड में चलेंगी क्लासेस
सभी शिक्षकों को छात्रों की अटेंडेंस का पूरा रिकॉर्ड रखने को कहा गया है. 

Central University of Rajasthan online classes : राजस्थान सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने 15 जुलाई से शुरू हो रहे नए सेमेस्टर की क्लास 14 अगस्त तक पूरी तरह से ऑनलाइन मोड में चलेंगी. प्रशासन ने यह कदम मौसम विभाग की उस अलर्ट को देखते हुए उठाया है, जिसमें इस साल एल नीनो (El Nino) के असर और कम बारिश की आशंका जताई गई है. राज्य में पानी की संभावित कमी को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने एहतियातन यह फैसला लिया है, ताकि पढ़ाई भी न रुके और पानी की बचत भी हो सके.

क्यों लिया गया ऑनलाइन क्लास का फैसला?

यूनिवर्सिटी के आधिकारिक आदेश के मुताबिक, कैंपस को स्मूथली चलाने, हॉस्टल्स, लैबोरेट्रीज  और स्टाफ के लिए हर दिन लगभग 3.5 लाख लीटर पानी की जरूरत होती है. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि फिलहाल कैंपस में पानी के पर्याप्त इंतजाम हैं. लेकिन अगर मानसून में बारिश उम्मीद से कम होती है, तो आगे चलकर परेशानी बढ़ सकती है.

यही कारण है कि एक महीने के लिए कैंपस में भीड़ कम करने का फैसला लिया गया है. इससे पानी की भारी बचत होगी और मौजूद संसाधनों का बेहतर मैनेजमेंट किया जा सकेगा.

पढ़ाई पर नहीं पड़ेगा कोई असर

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि इस फैसले से उनके पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा. सभी क्लास तय समय पर ऑनलाइन चलती रहेंगी.

टीचर्स के लिए क्या हैं गाइडलाइंस?

  • जिन टीचर्स की गर्मियों की छुट्टियां 14 जुलाई को खत्म हो रही हैं, वे यूनिवर्सिटी कैंपस में आकर ऑनलाइन क्लास लेंगे.
  • जिन टीचर्स की छुट्टियां 21 जुलाई तक हैं, वे तब तक अपने घर या लोकेशन से ही वर्चुअल क्लास ले सकेंगे.
  • छुट्टी खत्म होने के बाद उन्हें भी कैंपस आकर ऑनलाइन पढ़ाना होगा.

सभी टीचर्स को स्टूडेंट्स की अटेंडेंस का पूरा रिकॉर्ड रखने को कहा गया है. यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह से टेंपरेरी है, जिसका मकसद पर्यावरण और कैंपस को बेहतर ढंग से संभालना है.

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