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DU Admission 2026: री-इवैल्यूएशन में एक नंबर का खेल बदल सकता है कॉलेज, जानिए कैसे

DU में एडमिशन CUET-UG के स्कोर के आधार पर दिया जाता है. लेकिन CUET-UG में एक जैसे नंबर आने पर 'टाई-ब्रेकर' की मदद ली जाती है. 12वीं बोर्ड के मार्क्स 'टाई-ब्रेकर' का काम करते हैं. जिसके ज्यादा नंबर 12वीं बोर्ड में आते हैं, उसको कॉलेज में सीट दी जाती है.

DU Admission 2026: री-इवैल्यूएशन में एक नंबर का खेल बदल सकता है कॉलेज, जानिए कैसे
CBSE Re-evaluation vs DU/CUET Cut-off: एक नंबर बढ़ने या घटने से बदल जाएगी कॉलेज की प्रेफरेंस लिस्ट

CBSE क्लास 12 की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया का सीधा असर दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के एडमिशन पर भी पड़ता है. कॉम्पिटिशन वाले इस माहौल में एक-एक नंबर बेहद जरूरी होता है. दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के अंदर आने वाले कॉलेजों में दाखिला लेना किसी जंग से कम नहीं है. कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के स्कोर के आधर पर मेरिट लिस्ट निकाली जाती है. जिसके आधार पर ही दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज में दाखिला मिलता है. लेकिन दाखिले की इस पूरी प्रक्रिया में बोर्ड एग्जाम के मार्क्स भी एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं. री-इवैल्यूएशन के दौरान अगर एक नंबर का भी फर्क आता है, तो इससे कॉलेज अलॉटमेंट की रणनीति पूरी तरह बदल सकती है. आइए समझते हैं, 12वीं बोर्ड एग्जाम और  DU/CUET कट ऑफ के इस नंबर गेम को.

DU एडमिशन की प्रक्रिया

साल 2022 से डीयू के कॉलेजों में दाखिला CUET (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) के आधार पर मिल रहा है. ये एग्जाम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) आयोजित करवाती है. डीयू के अलावा ओर भी ऐसे कॉलेज हैं जहां पर दाखिला CUET स्कोर के आधार पर मिलता है. DU एडमिशन के लिए CUET-UG स्कोर मुख्य क्राइटेरिया होते हैं. हालांकि CBSE 12वीं बोर्ड के मार्क्स टाई-ब्रेकर की तरह काम करते हैं. 

अगर कोई छात्र किसी कोर्स में दाखिले के लिए एक जैसा CUET स्कोर लाते हैं, तो DU टाई-ब्रेकर का सहारा लेकर दाखिला देता है.  पहला टाई-ब्रेकर 12वीं क्लास के बेस्ट 3 सब्जेक्ट्स में ज़्यादा टोटल परसेंटेज होता है, जिसके ज्यादा नंबर होते हैं, उसे कैंडिडेट को सीट मिल जाती है. अगर फिर भी टाई रहता है, तो दूसरा टाई-ब्रेकर का इस्तेमाल किया जाता है. जिसके तहत  बेस्ट 4 सब्जेक्ट्स की तुलना की जाती है. इसके बाद तीसरा टाई-ब्रेकर, बेस्ट 5 सब्जेक्ट्स होते हैं. सबसे आखिरी टाई-ब्रेकर, आयु होती है. मतलब आयु में जो कैंडिडेट्स बड़ा होता है उसे प्राथमिकता मिलती है.

आपका स्कोरकैंडिडेट बी का स्कोरस्थिति
CUET स्कोर800 में से 760800 में से 760दोनों के बीच में टाई होता है
पहला टाई-ब्रेकर: बेस्ट 3 सब्जेक्ट्स के नंबर300 में से 280300 में से 280दोनों के बीच में टाई होता है
दूसरा टाई-ब्रेकर: बेस्ट 4 सब्जेक्ट्स के नंबर400 में से 375400 में से 375दोनों के बीच में टाई होता है
तीसरा टाई-ब्रेकर: बेस्ट 5 सब्जेक्ट्स के नंबर500 में से 487500 में से 488कैंडिडेट बी का स्कोर सबसे ज्यादा है उसे दाखिला मिल जाएगा

वहीं इस बीच अगर आपने री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई किया है और आपके नंबर इस प्रक्रिया में बढ़ जाते हैं, तो आपको दाखिला मिल जाएगा. यानी री-इवैल्यूएशन के दौरान एक भी नंबर जुड़ने या घटने से 'बेस्ट-3' या 'बेस्ट-5' के नंबर बदल जाते हैं. ये नंबर टाई-ब्रेकर की स्थिति में काफी महत्वपूर्ण रोल प्ले करते हैं. ये नंबर आपको आगे निकाल सकते हैं या पीछे भी कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें- री-इवैल्यूएशन के बाद कहां जारी होगा CBSE 12वीं का रिजल्ट? ऐसे करें चेक

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