CBSE क्लास 12 की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया का सीधा असर दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के एडमिशन पर भी पड़ता है. कॉम्पिटिशन वाले इस माहौल में एक-एक नंबर बेहद जरूरी होता है. दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के अंदर आने वाले कॉलेजों में दाखिला लेना किसी जंग से कम नहीं है. कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के स्कोर के आधर पर मेरिट लिस्ट निकाली जाती है. जिसके आधार पर ही दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज में दाखिला मिलता है. लेकिन दाखिले की इस पूरी प्रक्रिया में बोर्ड एग्जाम के मार्क्स भी एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं. री-इवैल्यूएशन के दौरान अगर एक नंबर का भी फर्क आता है, तो इससे कॉलेज अलॉटमेंट की रणनीति पूरी तरह बदल सकती है. आइए समझते हैं, 12वीं बोर्ड एग्जाम और DU/CUET कट ऑफ के इस नंबर गेम को.
DU एडमिशन की प्रक्रिया
साल 2022 से डीयू के कॉलेजों में दाखिला CUET (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) के आधार पर मिल रहा है. ये एग्जाम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) आयोजित करवाती है. डीयू के अलावा ओर भी ऐसे कॉलेज हैं जहां पर दाखिला CUET स्कोर के आधार पर मिलता है. DU एडमिशन के लिए CUET-UG स्कोर मुख्य क्राइटेरिया होते हैं. हालांकि CBSE 12वीं बोर्ड के मार्क्स टाई-ब्रेकर की तरह काम करते हैं.
अगर कोई छात्र किसी कोर्स में दाखिले के लिए एक जैसा CUET स्कोर लाते हैं, तो DU टाई-ब्रेकर का सहारा लेकर दाखिला देता है. पहला टाई-ब्रेकर 12वीं क्लास के बेस्ट 3 सब्जेक्ट्स में ज़्यादा टोटल परसेंटेज होता है, जिसके ज्यादा नंबर होते हैं, उसे कैंडिडेट को सीट मिल जाती है. अगर फिर भी टाई रहता है, तो दूसरा टाई-ब्रेकर का इस्तेमाल किया जाता है. जिसके तहत बेस्ट 4 सब्जेक्ट्स की तुलना की जाती है. इसके बाद तीसरा टाई-ब्रेकर, बेस्ट 5 सब्जेक्ट्स होते हैं. सबसे आखिरी टाई-ब्रेकर, आयु होती है. मतलब आयु में जो कैंडिडेट्स बड़ा होता है उसे प्राथमिकता मिलती है.
| आपका स्कोर | कैंडिडेट बी का स्कोर | स्थिति | |
| CUET स्कोर | 800 में से 760 | 800 में से 760 | दोनों के बीच में टाई होता है |
| पहला टाई-ब्रेकर: बेस्ट 3 सब्जेक्ट्स के नंबर | 300 में से 280 | 300 में से 280 | दोनों के बीच में टाई होता है |
| दूसरा टाई-ब्रेकर: बेस्ट 4 सब्जेक्ट्स के नंबर | 400 में से 375 | 400 में से 375 | दोनों के बीच में टाई होता है |
| तीसरा टाई-ब्रेकर: बेस्ट 5 सब्जेक्ट्स के नंबर | 500 में से 487 | 500 में से 488 | कैंडिडेट बी का स्कोर सबसे ज्यादा है उसे दाखिला मिल जाएगा |
वहीं इस बीच अगर आपने री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई किया है और आपके नंबर इस प्रक्रिया में बढ़ जाते हैं, तो आपको दाखिला मिल जाएगा. यानी री-इवैल्यूएशन के दौरान एक भी नंबर जुड़ने या घटने से 'बेस्ट-3' या 'बेस्ट-5' के नंबर बदल जाते हैं. ये नंबर टाई-ब्रेकर की स्थिति में काफी महत्वपूर्ण रोल प्ले करते हैं. ये नंबर आपको आगे निकाल सकते हैं या पीछे भी कर सकते हैं.
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