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पुलिस केस दर्ज होने के बाद क्या IAS-IPS बन सकते हैं? प्रोटेस्ट के बीच जान लीजिए नियम

नियमों के अनुसार केवल FIR दर्ज होने से कोई उम्मीदवार UPSC परीक्षा देने या चयनित होने से नहीं रुकता. हालांकि नियुक्ति से पहले पुलिस वेरिफिकेशन में केस की प्रकृति और उम्मीदवार द्वारा दी गई जानकारी अहम भूमिका निभाती है.

पुलिस केस दर्ज होने के बाद क्या IAS-IPS बन सकते हैं? प्रोटेस्ट के बीच जान लीजिए नियम
अगर आप जानकारी छिपाते हैं और पुलिस को जानकारी मिलती है तो आपकी नियुक्ति को रद्द किया जा सकता है, भले ही बाद में आप निर्दोष सिद्ध हो जाएं. 

दिल्ली में नीट पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई छात्रों पर FIR दर्ज की गई है. जिसको लेकर सड़क से लेकर संसद तक हंगामा बरपा है. सीजेपी ने चेतावनी तक दे दी है कि अगर छात्रों पर की गई एफआईआर वापस नहीं ली जाती है तो दोबारा से प्रदर्शन करेंगे.विपक्ष भी एफआईआर के मामले को लेकर सरकार पर हमलावर है. ऐसे में एक सवाल तेजी से चर्चा में है क्या किसी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस केस या FIR दर्ज होने पर वह IAS, IPS या अन्य सिविल सेवाओं में सिलेक्ट हो सकता है? क्योंकि ये छात्रों का मामला है ऐसे में इस तरह का सवाल दिमाग में आना वाजिब है. तो चलिए आसान भाषा में समझते हैं...

परीक्षा दे सकता है

कानूनी और प्रशासनिक नियमों को अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर या कोई लंबित आपराधिक मामला चल रहा है तो भी उसे परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता है. क्योंकि एफआईआर होना और दोषी सिद्ध होना दो अलग-अलग बातें हैं. भारत के कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि उस पर अपराध सिद्ध न हो जाए.

सबसे जरूरी है सही जानकारी

तो कुल मिलाकर यूपीएससी के तीनों चरणों यानी प्री, मेन्स और इंटरव्यू में शामिल हो सकते हैं. हालांकि अंतिम नियुक्ति से पहले होने वाली कैरेक्टर वैरिफिकेशन, पुलिस वैरिफिकेशन प्रोसेस सबसे अहम होती है. इस दौरान उम्मीदवार से उसके खिलाफ दर्ज मामलों की पूरी डिटेल मांगता है. इस दौरान आप एफआईआर या कोई अन्य लंबित मामले की जानकारी को बिल्कुल न छिपाएं. वैरिफिकेशन फॉर्म में सभी जानकारी सही-सही भरिए. 

जानकारी छुपाई तो रद्द होगी नियुक्ति

अगर आप जानकारी छिपाते हैं और इसकी पुलिस को जानकारी मिलती है तो आपकी नियुक्ति को रद्द किया जा सकता है, भले ही बाद में आप निर्दोष सिद्ध हो जाएं. 

कब पड़ सकता है असर

अगर आपके खिलाफ मामला गंभीर अपराध, भ्रष्टाचार, हिंसा, यौन या नैतिक अधमता से जुड़ा है तो अपॉइंटिंग ऑथिरिटी उम्मीदवार की उपयुक्तता पर सवाल खड़ा कर सकती है. इसके अलावा मामूली या विवादित मामलों में फैसला केस-दर केस आधार पर लिया जा सकता है. 

तो कुल मिलाकर निष्कर्ष ये निकलता है कि आप इस प्रतिष्ठित परीक्षा के तीनों चरणों में बैठ सकते हैं, लेकिन नियुक्ति के समय चरित्र सत्यापन, केस किस तरह का है और अदालत में मौजूदा स्थति क्या है इस आधार पर निर्णय लिया जाता है. 

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