बिहार के ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सुदूर संवेदन संस्थान (IIRS) का नया नोडल सेंटर घोषित किया गया है. इस गौरवशाली साझेदारी के तहत विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं को रिमोट सेंसिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) जैसे अत्याधुनिक विषयों में विशेष ऑनलाइन कोर्स करने का मौका मिलेगा. सबसे खास बात यह है कि छात्रों के लिए ये सभी महत्वपूर्ण स्पेस साइंस सिलेबस पूरी तरह से फ्री होंगे.
टेक्नोलॉजी से जुड़ने का मौका मिलेगा
विश्वविद्यालय की ओर से मंगलवार को जारी एक प्रेस बयान के अनुसार, आईआईआरएस-इसरो के डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम (डीएलपी) के माध्यम से विभिन्न शैक्षणिक विषयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से जुड़ने का अवसर मिलेगा. इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें भाग लेने के लिए छात्रों को किसी एक विशेष विभाग तक सीमित नहीं रहना होगा. विश्वविद्यालय के सभी विभागों के विद्यार्थी इन पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकेंगे.
स्टडी मैटेरियल भी कराया जाएगा उपलब्ध
इस पहल के तहत स्टूडेंट्स को इसरो के ई-क्लास प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाइव और संवादात्मक ऑनलाइन कक्षाओं के साथ स्टडी मैटेरियल भी उपलब्ध कराई जाएगी. इससे स्टूडेंट्स को स्पेस साइंस, पृथ्वी के संसाधनों के आकलन और भौगोलिक आंकड़ों के एनालिसिस जैसी टेक्नोलॉजी की जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी.
यूनिवर्सिटी के अनुसार, साल 2026 में उपलब्ध सिलेबस, उनकी अवधि और निर्धारित टाइम-टेबल की जानकारी आईआईआरएस-इसरो के आधिकारिक कोर्स कैलेंडर में देखी जा सकती है. नालंदा विश्वविद्यालय के नोडल सेंटर के माध्यम से आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को रजिस्ट्रेशन की स्वीकृति और अन्य संबंधित जानकारियों के लिए स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज के प्रोफेसर दीपक कुमार से संपर्क करना होगा. उन्हें इस कार्यक्रम के लिए नामित समन्वयक बनाया गया है.
कौशल विकास और शोध क्षमता मिलेगा बढ़ावा
आईएनएस के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस साझेदारी से विद्यार्थियों को पारंपरिक अकादमिक अध्ययन के साथ अत्याधुनिक तकनीकी ज्ञान हासिल करने का अवसर मिलेगा. इससे उनके कौशल विकास और शोध क्षमता को भी बढ़ावा मिल सकता है. यह पहल नालंदा विश्वविद्यालय की अंतर्विषयक शिक्षा, शोध और ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. साथ ही, इसरो जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के शैक्षणिक कार्यक्रम से जुड़ने के कारण विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों के क्षेत्र में अपनी समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा.
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