विज्ञापन

अब नहीं चलेगा कागजी खेल! पैरामेडिकल-फार्मेसी कॉलेजों का मान्यता प्रोसेस होगा डिजिटल

इस नई व्यवस्था का मकसद केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा उपलब्ध करना है. ऑनलाइन मॉनिटरिंग और वीडियो वेरिफिकेशन से उन संस्थानों पर सख्ती होगी जो अब तक केवल कागजों पर सुविधाएं दिखाते थे. इससे छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.

अब नहीं चलेगा कागजी खेल! पैरामेडिकल-फार्मेसी कॉलेजों का मान्यता प्रोसेस होगा डिजिटल
बिहार की पैरामेडिकल शिक्षा में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.

Paramedical new norms : बिहार ने मेडिकल की पढ़ाई को पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में अहम पहल शुरू की है. बिहार हेल्थ डिपार्टमेंट के अनुसार, अब राज्य के पैरामेडिकल और फार्मेसी कॉलेजों का मान्यता प्रोसेस पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा. इससे पहले राज्य सरकार नर्सिंग कॉलेजों के लिए यह सिस्टम लागू कर चुकी है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार, मान्यता के लिए आवेदन करने से लेकर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिलने तक की पूरा प्रोसेस अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पूरा होगा.

इसके लिए एक आधुनिक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जो जल्द ही पूरी तरह लागू होगा. इससे लंबे और मुश्किल प्रोसेस से राहत मिलेगी.

वीडियो के जरिए होगी सच्चाई की जांच

नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब संस्थानों को केवल कागजी दावे नहीं करने होंगे, बल्कि उन्हें अपनी सुविधाओं का प्रूफ भी देना होगा. पोर्टल पर लैब, क्लासरूम, फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और कैंपस की स्थिति का वीडियो अपलोड करना अनिवार्य होगा. इसके अलावा सभी टीचर्स या प्रोफेसर्स और कर्मचारियों की तस्वीरें भी पोर्टल पर डालनी होंगी. इससे न केवल डिपार्टमेंट को निगरानी में आसानी होगी, बल्कि छात्र और पैरेंट्स भी घर बैठे संस्थानों की असली स्थिति देख सकेंगे.

पैरामेडिकल सीटों में बढ़ोतरी

बिहार की पैरामेडिकल शिक्षा में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. राज्य में फिलहाल कुल 33,171 सीटें उपलब्ध हैं. इनमें 42 सरकारी इंस्टीट्यूट्स में 3,321 सीटें और 86 प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स में 29,850 सीटें शामिल हैं. वहीं, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, शिवहर और बेगूसराय में नए सरकारी पारा मेडिकल कॉलेजों का निर्माण अंतिम चरण में है, जिससे सीटों में और बढ़ोतरी होगी. इसके अलावा राज्य में नर्सिंग शिक्षा का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है. फिलहाल बिहार में 41,000 से ज्यादा नर्सिंग सीटें हैं. इनमें 125 सरकारी इंस्टीट्यूट्स में 7,538 सीटें और 531 प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स में 33,500 सीटें शामिल हैं.

क्वालिटी पर जोर

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस नई व्यवस्था का मकसद केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा उपलब्ध करना है. ऑनलाइन मॉनिटरिंग और वीडियो वेरिफिकेशन से उन संस्थानों पर सख्ती होगी जो अब तक केवल कागजों पर सुविधाएं दिखाते थे. इस पहल से छात्रों को बेहतर लैब, अनुभवी शिक्षक और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, जिससे भविष्य में राज्य को स्किल्ड और ट्रेन्ड हेल्थ वर्कर्स मिल सकेंगे.

यह भी पढ़ें- UPTET 2026: ग्रेजुएशन में 50% से कम नंबर हैं, फिर भी बन सकते हैं सरकारी टीचर, जानिए कैसे

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com