MCA में बड़ा बदलाव, अब 3 नहीं 2 साल ही पढ़ना होगा ये कोर्स, जानिए डिटेल

मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशन (MCA) कोर्स अब 3 के बजाए 2 साल ही पढ़ना होगा.

MCA में बड़ा बदलाव, अब 3 नहीं 2 साल ही पढ़ना होगा ये कोर्स, जानिए डिटेल

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशन (MCA) कोर्स अब 3 के बजाए 2 साल ही पढ़ना होगा. दिसंबर 2019 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की 545वीं बैठक में पाठ्यक्रम की अवधि को एक वर्ष कम करने का निर्णय लिया गया था. नए शैक्षणिक सत्र से एमसीए (MCA) कार्यक्रम को नए पाठ्यक्रम की अवधि के अनुसार पढ़ाया जाएगा. जिन उम्मीदवारों ने बीसीए (BCA) बैचलर डिग्री इन कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग या  B.Sc./ B.Com./ B.A.कोर्स मैथेमेटिक्स के साथ पास किया है या फिर 10+2 में मैथेमेटिक्स पढ़ा है. इसके साथ ही जिन स्टूडेंट्स ने एग्जामिनेशन में कम से कम 55 फीसदी नंबर हासिल किए हैं वे MCA कोर्स में एडमिशन लेने के योग्य हैं. 

बता दें कि एमसीए (MCA) कार्यक्रम में नामांकन संख्या कम हो गई है. 2019-2020 में इस कोर्स को लिए लेने वालों की संख्या 2015-16 में लेने वालों की संख्या की तुलना में काफी कम हो गई है. वहीं,  MCA पाठ्यक्रम चलाने के लिए संस्थानों में MOOCs सुविधा केंद्र और इनोवेशन लेबोरेटरी होना आवश्यक है. कक्षाओं को एलसीडी प्रोजेक्टर, स्मार्ट बोर्ड, इंटरनेट कनेक्शन आदि सुविधाएं होनी चाहिए. 


UGC संशोधित गाइडलाइन्स
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने संशोधित दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं. यूजीसी की गाइडलाइन्स में सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को अंतिम वर्ष के स्टूडेंट्स के लिए सितंबर तक परीक्षाएं आयोजित कराने के बारे में कहा गया है. सोमवार को हुई मीटिंग में यूजीसी के अधिकारियों ने ये फैसला लिया कि फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स के एग्जाम ऑनलाइन, ऑफलाइन या दोनों तरीकों से आयोजित किए जा सकते हैं. यूजीसी की संशोधित गाइडलाइन्स में ये भी बताया गया है कि बैक-लॉग वाले छात्रों को परीक्षाएं अनिवार्य रूप से देनी होंगी. 

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 वहीं, अन्य जो स्टूडेंट्स सितंबर की परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पाएंगे तो यूनिवर्सिटी उन स्टूडेंट्स के लिए बाद में स्पेशल परीक्षाएं आयोजित करेगी. जब भी संभव हो, विश्वविद्यालय द्वारा इन विशेष परीक्षाओं को  संचालित किया जा सकता है, ताकि विद्यार्थी को किसी भी असुविधा / नुकसान का सामना न करना पड़े. उपरोक्त प्रावधान केवल वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2019-20 के लिए सिर्फ एक बार के उपाय के रूप में लागू होगा.