यह ख़बर 21 जून, 2011 को प्रकाशित हुई थी

चीनी निर्यात कोटा बढ़ाने फिर पवार ने दिया जोर

खास बातें

  • पवार ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनसे अपील की है कि देश से और अधिक मात्रा में चीनी का निर्यात करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
नई दिल्ली:

कृषि मंत्री शरद पवार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर उनसे अपील की है कि देश से और अधिक मात्रा में चीनी का निर्यात करने की अनुमति दी जानी चाहिए। सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि कृषि मंत्री का कहना है कि इस समय अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीनी तेज है और इसका फायदा उठाने का यही सही वक्त है। उन्होंने यह भी कहा है कि भारत के लिए फायदे की यह स्थिति एक महीने तक ही रहेगी। अप्रैल में सरकार ने ओपन जनरल लाइसेंस (ओजीएल) के तहत पांच लाख टन चीनी का निर्यात करने को अनुमति दी थी। चीनी उद्योग 15 लाख टन अतिरिक्त चीनी का निर्यात करना चाहता है। सूत्रों के अनुसार पवार ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि घरेलू चीन उत्पादन जरूरत से ज्यादा है और वैश्विक बाजार में कीमतें ऊंची है। ऐसे में निर्यात बढाना ठीक रहेगा। भारत के मुकाबले विश्व बाजार में कीमतें 500-600 रुपये प्रति टन ऊंची हैं। का अधिक प्रीमियम है। निर्यात का फैसला सही समय पर करने की बात पर जोर देते हुए कृषि मंत्री ने कहा है कि पहले पांच लाख टन चीनी का निर्यात करने की अनुमति दिये जाने में होने वाली देरी के कारण देश पहले ही जनवरी-मार्च 2011 के दौरान चीनी निर्यात से लाभ काटने का एक अच्छा मौका गवां चुका है। पवार ने प्रधानमंत्री से कहा है, 'मेरा स्पष्ट मानना है कि हमें इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और उपलब्ध अधिशेष चीनी को तत्काल निर्यात करने की अनुमति दी जानी चाहिए। निर्णय लेने में देर प्रतिकूल कदम साबित होगा।' पिछले सप्ताह खाद्य मंत्री के वी थामस ने कहा था कि दीवाली तक कोई अतिरिक्त निर्यात करने की अनुमति नहीं दी जायेगी क्योंकि त्यौहारों के मौसम में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। पवार ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि अतिरिक्त चीनी निर्यात उन चीनी मिलों के अधिक स्टाक होने के बोझ को कम करेगा तथा उनका नकदी प्रवाह बढ़ेगा जिससे वे वित्तीय संकट से निबट सकेंगे और गन्ना किसानों को भुगतान कर सकेंगे। दुनिया में चीनी के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक देश और विशालतम खपतकर्ता देश भारत में 2010-11 के सत्र (अक्तूबर से सितंबर) में चीनी उत्पादन 2.42 करोड़ टन होने का अनुमान है जो उत्पादन पिछले सत्र में 1.88 करोड़ टन था। चीनी की वाषिर्क घरेलू मांग 2.2 से 2.25 करोड़ टन की है। पवार ने आगाह किया कि 2011-12 का सत्र अधिशेष वर्ष होने की उम्मीद है। इसके कारण गंभीर समस्यायें भी हो सकती हैं क्योंकि आने वाले वषरे में निर्यात के लाभप्रद विकल्प नहीं होंगे। चालू चीनी सत्र के अंत में भारत के पास 65 लाख टन का विशाल स्टाक होगा जो तीन माह की खपत के मानदंड से कहीं काफी अधिक होगा।


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