यह ख़बर 11 अप्रैल, 2013 को प्रकाशित हुई थी

हमें सालों से निशाना बनाया जा रहा है, पर हार नहीं मानेंगे: सुब्रत रॉय

खास बातें

  • सेबी के साथ चर्चित विवाद में उलझे सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को लगता है कि उन्हें पिछले कुछ वर्ष से उत्पीड़ित किया जा रहा है और इसकी शुरुआत 2005 में राजनीतिक द्वेष की घटना के साथ हुई तथा रिजर्व बैंक और सेबी उनकी कंपनियों के खिलाफ शिंकजा कसने लगे।
नई दिल्ली:

बाजार नियामक सेबी के साथ चर्चित विवाद में उलझे सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को लगता है कि उन्हें पिछले कुछ वर्ष से उत्पीड़ित किया जा रहा है और इसकी शुरुआत 2005 में राजनीतिक द्वेष की घटना के साथ हुई तथा रिजर्व बैंक और सेबी उनकी कंपनियों के खिलाफ शिंकजा कसने लगे।

गौरतलब है कि समूह की दो कंपनियों के निवेशकों का करीब 24,000 करोड़ रुपये वापस करने के मामले में उनके व्यक्तिगत और कंपनी की संपत्तियों की सेबी द्वारा नीलामी कराए जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। सुब्रत रॉय को इस मामले में बुधवार को मुंबई में सेबी के मुख्यालय पर तलब किया गया था।

रॉय ने पीटीआई के साथ फोन पर बातचीत में कहा, इसकी शुरुआत 2005 में हमारे खिलाफ एक राजनीतिक द्वेष के साथ हुई और उसके बाद से एक सिलसिला चल पड़ा। पहले रिजर्व बैंक ने 2008 में हमारे खिलाफ कार्रवाई की, उसके बाद सेबी ने हमारी कंपनियों पर शिकंजे चढ़ा दिए। सहारा समूह विविध प्रकार के व्यवसाय में लगा है, जिसमें मनोरंजन से लेकर जमीन-जायदाद के विकास, तथा वित्तीय सेवाओं से लेकर होटल तक का कारोबार शामिल हैं।

रॉय ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की कार्रवाई के चलते उनकी अन्य कंपनियों के कारोबार पर असर पड़ रहा है। बावजूद इसके रॉय ने कहा कि वह 'आखिरी दम' तक लड़ेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि उचित समय पर मामला सुलझा लिया जाएगा।

सेबी ने रॉय और उनके तीन सहयोगियों को उनकी और सहारा समूह की दो कंपनियों - एसआईआरईसीएल और एसएचसीआईएल - की संपत्तियों की पुष्टि के लिए बुधवार को अपने मुख्यालय में बुलाया था, ताकि इन संपत्तियों की नीलामी के जरिये धन जुटाकर निवेशकों का पैसा लौटाया जा सके।

सेबी का आरोप है कि एसआईआरईसीएल और एसएचसीआईएल ने बांड धारकों से 6,380 करोड़ रुपये और 19,400 करोड़ रुपये जुटाए थे, लेकिन धन जुटाने के लिए कई तरह की अनियमिताताएं की गईं। सुप्रीम कोर्ट ने इन कंपनियों के तीन करोड़ से अधिक बांड धारकों का पैसा लौटाने का आदेश दे रखा है और निवेशकों का सत्यापन करते हुए पैसा लौटवाने का काम सेबी को दिया गया है।

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अपनी बात पर कायम सुब्रत रॉय का दावा है कि रिजर्व बैंक और सेबी के कुछ अधिकारी निजी खुन्नस के कारण उनके कंपनी समूह को निशाना बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में उनका 60 प्रतिशत समय सेबी से लड़ने में जाया हुआ, जिसका सदुपयोग रचनात्मक कार्य में हो सकता था। उन्होंने कहा, इस कारण हमें बहुत नुकसान हुआ है। यह पूछे जाने पर भी कि क्या वे प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं, उन्होंने कहा, निश्चित तौर पर हमें प्रताड़ित किया जा रहा है। सेबी हमें अकारण ही निशाने पर रखे हुए है।