यह ख़बर 16 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित हुई थी

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता

खास बातें

  • सुस्त पड़ती आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक मंगलवार को घोषित होने वाली सालाना मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।
मुंबई:

सुस्त पड़ती आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक मंगलवार को घोषित होने वाली सालाना मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।

सरकार और उद्योग जगत दोनों ही इसकी उम्मीद लगाए बैठे हैं।

पिछले करीब दो साल से ऊंची ब्याज दरों के कारण उपभोक्ता मांग में लगातार गिरावट का रुख रहा है। इससे उद्योगों में मांग कमजोर पड़ी है और आर्थिक वृद्धि का पहिया धीमा पड़ा है। समाप्त वित्त वर्ष 2011-12 में आर्थिक वृद्धि 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिजर्व बैंक के लिए मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बिठाना मुश्किलभरा काम हो गया है। हालांकि, रिजर्व बैंक ने इस चुनौती से निपटने का संकेत देते हुए कहा है कि मौद्रिक नीति का जोर अब गिरती आर्थिक वृद्धि को थामने की तरफ होना चाहिए, हालांकि इसके साथ ही मुद्रास्फीति पर भी नियंत्रण रखा जाना चाहिए।

वर्ष 2012-13 की ऋण एवं मौद्रिक नीति जारी करने की पूर्व संध्या पर जारी रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ने कहा, ‘पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीतिकारी धारणा कुछ नरम पड़ी लेकिन फिर भी यह ऊंची रही है। मुद्रास्फीति को लेकर जोखिम बरकरार है लेकिन मौद्रिक नीति का झुकाव मुद्रास्फीति पर अंकुश रखते हुए आर्थिक वृद्धि की गति में आती सुस्ती को थामने की तरफ होना चाहिए।’ रिजर्व बैंक की सोमवार को जारी वृहद आर्थिक और मौद्रिक विकास रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान मुद्रास्फीति पूरे साल मौजूदा स्तर पर ही बनी रह सकती है।

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थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति मार्च के आंकड़ों में 6.89 प्रतिशत रही है। यह पिछले तीन साल का सबसे न्यूनतम स्तर है। बहरहाल चालू वित्त वर्ष 2012-13 के लिए सरकार ने मुद्रास्फीति का स्तर 7.6 प्रतिशत पर रखा है।