यह ख़बर 07 जुलाई, 2014 को प्रकाशित हुई थी

रेल बजट 2014 : रेल बजट में कमाई बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा सकती है

नई दिल्ली:

रेल बजट से पहले किराये-भाड़े में बढ़ोतरी करने के बाद रेल मंत्री सदानंद गौड़ा नकदी की तंगी के मद्देनजर मंगलवार को अपने पहले बजट में नई ट्रेनों, लाइन तथा सर्वे की घोषणा के मामले में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना सकते हैं। गौरतलब है कि रेलवे के नकदी प्रवाह में इस समय 26,000 करोड़ रुपये की कमी महसूस हो रही है। यात्री किराये की आय में वृद्धि कम हो रही है। इसे देखते हुए बजट में इस मद में अतिरिक्त आय जुटाने की रणनीति की घोषणा की जा सकती है। रेल मंत्री कुछ अव्यवहारिक परियोजनाओं को रद्द कर सकते हैं और कुछ नई प्राथमिकता वाली परियोजनाओं की घोषणा कर सकते हैं।

ईंधन की लागत में बढ़ोतरी को देखते हुए सौर ऊर्जा तथा जैव डीजल जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के दोहन का राजग सरकार के पहले रेल बजट में जिक्र हो सकता है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रेल क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा का उपयोग चाहते हैं ताकि ईंधन पर निर्भरता कम हो। इसको देखते हुए बजट में रेलवे में अक्षय ऊर्जा के उपयोग के बारे में जिक्र हो सकता है।

गौड़ा शताब्दी और मुंबई उपनगरीय ट्रेनों में दरवाजों के स्वचालित बंद होने की पायलट परियोजना की घोषणा कर सकते हैं। ट्रेनों से दुर्घटनावश यात्रियों को नीचे गिरने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सुरक्षा उपायों के तहत यह कदम उठाया जा रहा है।

रेल बजट में कुछ नई ट्रेनों की घोषणा की जा सकती है इनमें कुछ एक प्रीमियम गाड़ियां भी हो सकती है। साथ ही विभिन्न तीर्थस्थलों के लिए कुछ नई सेवाएं पेश की जा सकती हैं।

रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण तथा उच्च गति वाली ट्रेन समेत रेल संबंधी ढांचागत सुविधाओं के विस्तार को लेकर विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के बारे में अपनी नीति का जिक्र कर सकती है।

रेल बजट में उच्च गति की ट्रेनों को चलाने के लिये ‘हीरक चतुभरुज’ तैयार करने के लिए कार्य योजना का जिक्र होगा।

बजट रेल भाड़ा प्राधिकरण तथा उच्च गति रेल प्राधिकरण पर राजग सरकार के विचारों को भी प्रतिबिंबित करेगा। चूंकि बड़ी परियोजनाओं में निजी कंपनियों को शामिल करना अब अनिवार्य हो गया है, ऐसे में रेलवे को बड़े निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अनुकूल नीति लानी होगी।

रेल क्षेत्र में निजी निवेश की संभावना का संकेत देते हुए प्रधानमंत्री ने हाल ही में कहा था कि निजी कंपनियां स्टेशनों के विकास जैसे रेल क्षेत्र में निवेश के लिए तैयार होंगी।

मोदी ने कहा था, यह सभी पक्षों के फायदे की परियोजना होगी और हम आने वाले दिनों में इस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। पूर्व रेल मंत्री मल्लिकाजरुन खड़गे ने अंतरिम बजट में 1.65 लाख करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य रखा था। इसमें 1.06 लाख करोड़ रुपये माल भाड़े से तथा 45,255 करोड़ रुपये यात्री किराये से जबकि शेष अन्य स्रोत से आने का अनुमान जताया गया था।

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चालू वित्त वर्ष के अंतरिम बजट में आम बजट से 40,000 करोड़ रुपये की सहायता की मांग करने वाला रेल मंत्रायल इस वर्ष रेलवे की सालाना योजना 64,000 करोड़ रुपये का रख सकता है।