यह ख़बर 17 जून, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'यूरोप में सरकारी ऋण संकट चिंता का कारण'

खास बातें

  • मुखर्जी के अनुसार उनका मानना है कि यह संकट चार देशों तक ही सीमित रहेगा और संभवत: इसका अन्य देशों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं हो।
नई दिल्ली:

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि कुछ यूरोपीय देशों में सरकारी ऋण संकट चिंता का कारण है। मुखर्जी के अनुसार उनका मानना है कि यह संकट चार देशों तक ही सीमित रहेगा और संभवत: इसका अन्य देशों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं हो। उन्होंने कहा, '...लेकिन बीते दो साल के घटनाक्रम के बाद मैं अधिक आश्वस्त नहीं हूं।' उल्लेखनीय है कि यूनान, पुर्तगाल तथा आयरलैंड वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहे हैं जबकि स्पेन भी इसकी चपेट में आ चुका है। मुखर्जी ने कहा कि ऋण संकट केवल यूरोप के लिए ही चिंता का विषय नहीं है बल्कि 'सरकारी ऋण संकट का खतरा गहराता जा रहा है और यह अन्य देशों में भी फैल रहा है जो बाजार के विश्वास को डिगाने वाला है।' उन्होंने कहा कि दुनिया के कुछ हिस्सों में राजनीतिक तथा सामाजिक उठापटक, कई देशों में प्राकृतिक आपदाताओं तथा फसलों के खराबी ने वैश्विक सुधारों को और जोखिमपूर्ण बना दिया है।


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