यह ख़बर 17 जुलाई, 2014 को प्रकाशित हुई थी

आधे बिजली संयंत्रों के पास सात दिन से भी कम का कोयला भंडार

नई दिल्ली:

देश के करीब 50 फीसदी ताप बिजलीघर कोयले के संकट की समस्या से जूझ रहे हैं और इनके पास सात दिन से कम का भी कोयला भंडार है। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी के बिजलीघर भी शामिल हैं। इन बिजलीघरों की कुल उत्पादन क्षमता 20,000 मेगावाट से अधिक है।

केंद्रीय बिजली प्राधिकरण (सीईए) के 15 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार कुल 100 कोयला आधारित बिजलीघरों में से 46 के पास सात दिन से कम का कोयला भंडार है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक एनटीपीसी कोयले का सबसे अधिक खपत करती है। कंपनी कोयले की कमी से बुरी तरह प्रभावित हुई है।

एनटीपीसी के 23 बिजलीघरों में आठ के पास सिर्फ दो दिन का कोयला भंडार है। ये आठ बिजलीघर हैं- झज्जर (1,500 मेगावाट), रिहंद (3,000 मेगावाट), सिंगरौली (2,000 मेगावाट), कोरबा (2,600 मेगावाट), सिपत (2,980 मेगावाट), विंध्याचल (4,260 मेगावाट), सिम्हाद्रि (2,000 मेगावाट), रामागुंडम (2,600 मेगावाट) शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार कोल इंडिया से आपूर्ति कम रहने की वजह से ये बिजलीघर प्रभावित हुए हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी और उसकी अनुषंगियां सालाना अनुबंधित मात्रा की तुलना में कम बिजली की आपूर्ति कर रही हैं। रपटों के अनुसार एनटीपीसी ने भी बिजली मंत्रालय से इस मुद्दे पर ध्यान देने को कहा है। बढ़ती गर्मी के बीच उत्तरी व मध्य भारत में बिजली की भारी कटौती हो रही है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


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