यह ख़बर 02 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

गरीबी रेखा की परिभाषा पर कल वक्तव्य देंगे मोंटेक

खास बातें

  • अहलूवालिया दस दिनों के विदेश दौरे से लौटे हैं। वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से भी मुलाकात करेंगे और गरीबी रेखा को लेकर उपजे विवाद पर स्थिति स्पष्ट करेंगे।
नई दिल्ली:

गरीबी रेखा की परिभाषा को लेकर चौतरफा आलोचना झेल रहे योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने आज कहा कि वह इस मुद्दे पर सोमवार को स्थिति स्पष्ट करेंगे। अहलूवालिया रविवार को ही दस दिनों के विदेश दौरे से लौटे हैं। वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाकात करेंगे और गरीबी रेखा को लेकर उपजे विवाद पर स्थिति स्पष्ट करेंगे। योजना आयोग ने उच्चतम न्यायालय में गरीबी की परिभाषा को लेकर एक हलफनामा दिया। इसमें कहा गया है कि शहरों में दैनिक 32 रुपये से अधिक खर्च करने वाला और ग्रामीण क्षेत्र में दैनिक 26 रुपये से अधिक खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है। आयोग की इस परिभाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। अहलूवालिया से जब ये पूछा गया कि आयोग क्या उच्चतम न्यायालय में इस मुद्दे पर नया हलफनामा दाखिल करेगा, जवाब में अहलूवालिया ने पेट्र को बताया मैं सोमवार को इस मुद्दे पर वक्तव्य दूंगा। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने भी मामले में हस्तक्षेप किया और समझा जाता है कि आयोग से गरीबी रेखा की परिभाषा के बारे में फिर से विचार करने को कहा है। इस बारे में अहलूवालिया से पूछे जाने पर उन्होंने कहा मैं आज ही विदेश से लौटा हूं और मामले को स्पष्ट करने के लिये मीडिया से सोमवार को मिलूंगा। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की सदस्या अरुणा रॉय के इस संबंध में खुले पत्र का भी संभवत अहलूवालिया सप्ताहांत जवाब देंगे। अरुणा रॉय ने 32 रुपये प्रति व्यक्ति खर्च की गरीबी की परिभाषा को चुनौती दी है। उधर, आयोग सूत्रों का कहना है कि आयोग इस मामले में उच्चतम न्यायालय में नया अलफनामा सौंप सकता है। इसमें आयोग स्पष्ट कर सकता है कि 32 रुपये की खर्च सीमा को आयोग गरीबों को दिये जाने वाले लाभों के मामले में उपयोग में नहीं लायेगा। अहलूवालिया के इस मुद्दे पर ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश से भी सोमवार को मुलाकात करने की उम्मीद है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कल इस मुद्दे पर कहा था योजना आयोग ने अलफनामा दिया है। हमने जब इसके बारे में जानकारी मांगी तो कहा गया कि यह शुरुआती दस्तावेज था अंतिम नहीं।उन्होंने आगे कहा ये आंकड़े बदल सकते हैं, कोई नये आंकड़े आ सकते हैं जो कि योजना आयोग को स्वीकार्य होंगे। लोगों में चिंता है। लोगों में इसको लेकर भ्रम है और कुछ का मानना है कि यह वास्तविकता से हटकर है।


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