यह ख़बर 27 फ़रवरी, 2013 को प्रकाशित हुई थी

खुदरा क्षेत्र में एफडीआई से प्रभावित नहीं होंगे छोटे दुकानदार : समीक्षा

खास बातें

  • सरकार ने आज कहा कि छोटे परंपरागत दुकानदार संगठित क्षेत्र के रिटेलरों को कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं और विदेशी कंपनियों को देश में स्टोर खोलने की अनुमति के फैसले से वे प्रभावित नहीं होंगे।
नई दिल्ली:

सरकार ने आज कहा कि छोटे परंपरागत दुकानदार संगठित क्षेत्र के रिटेलरों को कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं और विदेशी कंपनियों को देश में स्टोर खोलने की अनुमति के फैसले से वे प्रभावित नहीं होंगे।

संसद में आज पेश 2012-13 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि जहां तक छोटे दुकानदारों का सवाल है, संगठित खुदरा क्षेत्र उनके साथ चल रहा है। समीक्षा कहती है, कारोबारी व्यवहार में सुधार तथा प्रौद्योगिकी उन्नयन के जरिये ये परंपरागत खुदरा दुकानदार संगठित क्षेत्र को कड़ा जवाब दे रहे हैं। इसमें कहा गया है कि वैश्विक अनुभव भी यह बताता है कि संगठित और असंगठित खुदरा क्षेत्र साथ-साथ चल सकता है और प्रगति कर सकता है। सरकार ने बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी है। एकल ब्रांड में तो शतप्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र को एफडीआई के लिए खोलने का देश का व्यापारी वर्ग कड़ा विरोध कर रहा है। इसके विरोध में देशभर में आंदोलन और अभियान चलाया जा रहा है।

हालांकि, आर्थिक समीक्षा में इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा गया है कि बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की अनुमति से आपूर्ति शृंखला के सभी अंशधारकों को फायदा होगा। इसमें कहा गया है कि किसानों को कटाई बाद होने वाले फसल नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही बैकएंड ढांचे में सुधार से किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य मिल सकेगा।

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

इसी तरह छोटे विनिर्माताओं को लघु उद्योग से आवश्यक रूप से 30 प्रतिशत की खरीद के प्रावधान से फायदा होगा। इसके अलावा इस नीति के क्रियान्वयन से देश में एफडीआई का प्रवाह बढ़ेगा, रोजगार की गुणवत्ता सुधरेगी और सर्वश्रेष्ठ वैश्विक व्यवहार को अपनाया जा सकेगा।