नई दिल्ली:
पेट्रोलियम मंत्रालय ने नई सरकार के समक्ष रखे जाने वाले मुद्दों की तैयारी कर ली है। मंत्रालय का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के अपने मुख्य कामकाज पर ध्यान नहीं दे पाने की वजह से तेल एवं गैस का उत्पादन तेजी से नहीं बढ़ पा रहा है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि सस्ते गैस सिलेंडर की संख्या बढ़ाना सही कदम नहीं था।
नरेंद्र मोदी सरकार के लिए तैयार अपनी प्रस्तुती में मंत्रालय ने कहा है कि राष्ट्रीय तेल कंपनियां घरेलू उत्खनन की तरफ पूरा ध्यान नहीं दे पा रही हैं। निजी क्षेत्र की तेल उत्खनन कंपनियों के साथ हस्ताक्षरित अनुंबध के ईद गिर्द कानूनी विवाद सहित पांच ऐसे मुद्दे इसमें गिनाए गए हैं जो कि पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल में समस्या का कारण रहे।
इस पूरे मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की सीमा छह से बढ़ाकर 9 और फिर इसे 9 से बढ़ाकर 12 किया गया। यह नहीं किया जाना चाहिए था। मंत्रालय का यह भी मानना है कि एलपीजी पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना (डीबीटी) सही नहीं थी। इसके तहत ग्राहक को बाजार दर पर रसोई गैस सिलेंडर खरीदने होती है और सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में भेज दी जाती थी।
मंत्रालय की प्रस्तुति में जिन अन्य कमियों को गिनाया गया है, उसमें उत्पादन साझेदारी अनुबंध (पीएससी) को लेकर कानूनी विवाद है तथा अमेरिकी प्रतिबंध के कारण ईरान के साथ जुड़ने को लेकर कोई स्पष्टता नहीं होना भी शामिल है। इसके कारण बड़े गैस क्षेत्र में भागीदारी में देरी हुई। साथ ही ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन पर भी असर पड़ा।
निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का विभिन्न मुद्दों को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ विवाद चल रहा है। केजी बेसिन में लक्ष्य से कम उत्पादन रहना, तेल एवं गैस की कोई खोज वाणिज्यिक रूप से व्यवहारिक है अथवा नहीं यह कैसे पता चले। जो समय देश में तेल एवं गैस का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देने में लगना चाहिये था वह समय न्यायालय में कानूनी विवादों की लड़ाई में बीत रहा है।
सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल सचिव अजित सेठ के कहने पर मंत्रालय ने यह प्रस्तुतीकरण तैयार किया है। इसमें इस बात पर भी जोर दिया गया है कि अब तक के अनुभवों के आधार पर उत्पादन भागीदारी अनुबंध (पीएससी) में बदलाव किया जाना चाहिए और इसे नए रूप में तैयार किया जाना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार मंत्रालय का यह भी मानना है कि तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) पेट्रोरसायन और तेल रिफाइनिंग तथा एलएनजी टर्मिनल जैसे क्षेत्रों में विस्तार कर रही है जिसकी वजह से तेल एवं प्राकृतिक गैस की खोज एवं उत्पादन से उसका ध्यान बंट रहा है। मंत्रालय ने इसी संदर्भ में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन का भी उदाहरण दिया है कि वह अपनी रिफाइनिंग की मुख्य गतिविधि से हटकर चीनी मिल लगा रही है।
मंत्रालय ने कुछ उपलब्धियों भी गिनाई हैं। पिछले पांच साल में चार करोड़ टन रिफाइनरी क्षमता जुटाई गई और यह 17.5 करोड़ से बढ़कर 21.5 करोड़ टन हो गई। जून 2010 से पेट्रोल के दाम को नियंत्रणमुक्त करने और जनवरी 2013 से डीजल के दाम में हर महीने हल्की वृद्धि के फैसले को भी इसमें बताया गया है। मंत्रालय ने 53.30 लाख टन कच्चे तेल के भंडारण की व्यवस्था के बारे में भी बताया है।
मंत्रालय ने अगले पांच साल के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का उत्पादन कम से कम 25 प्रतिशत तथा रिफाइनिंग क्षमता में ढाई करोड़ टन वृद्धि का लक्ष्य रखा है।