यह ख़बर 31 मई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

विकास का ब्रेकडाउन, चौथी तिमाही में 5.3% रही जीडीपी

खास बातें

  • चौथी तिमाही में आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी भारी गिरावट के साथ 5.3 प्रतिशत पर रही, जबकि उम्मीद जताई जा रही थी कि ये आंकड़े 6.1 प्रतिशत के आसपास रहेंगे।
नई दिल्ली:

भारतीय अर्थव्यवस्था देश-विदेश के तंग हालात में फंसकर पिछले वित्तवर्ष 2011-12 की आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च 2012) में मात्र 5.3 प्रतिशत बढ सकी और इसके चलते वार्षिक आर्थिक वृद्धि 6.5 प्रतिशत तक ही सीमित रही। इससे पिछले वित्तवर्ष के दौरान भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8.4 प्रतिशत वृद्धि हुई थी और आखिरी तिमाही की वृद्धि 9.2 प्रतिशत थी।
 पिछले करीब नौ वर्ष में चौथी तिमाही की यह न्यूनतम वृद्धि है।

गुरुवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च, 2012 को समाप्त वित्तवर्ष की आखिरी तिमाही में कारखाना क्षेत्र का उत्पादन एक वर्ष पहले की तुलना में 0.3 प्रतिशत संकुचित हो गया। 2010-11 में इसी दौरान इस क्षेत्र का उत्पादन सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत ऊंचा रहा था। इस बार आखिरी तिमाही में कृषि उत्पादन भी मात्र 1.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि एक वर्ष पूर्व इसी दौरान कृषि वृद्धि 7.5 प्रतिशत थी।

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उम्मीद जताई जा रही थी कि चौथी तिमाही में आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी 6.1 प्रतिशत के आसपास रहेगी। पहले रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया था कि ये आंकड़े 6.9 प्रतिशत तक पहुंच जाएंगे, लेकिन ताजा आंकड़े काफी निराशाजनक है। जानकारों का मानना है कि सरकार की नीतियों, रुपये की कमजोरी और दुनिया भर में खराब आर्थिक हालात की वजह से विकास दर धीमी हुई है।