रक्षा उत्पादन से जुड़ी भारतीय कंपनियों की बल्ले-बल्ले : रक्षा पूंजीगत व्यय का 75% घरेलू कंपनियों से खरीदा भारत

अधिकारियों ने ‘एयरो इंडिया’ से इतर कहा कि इस कदम का मतलब अगले वित्त वर्ष के केंद्रीय बजट में घोषित कुल रक्षा पूंजी परिव्यय 1,62,600 करोड़ रुपये में से करीब एक लाख करोड़ रुपये घरेलू स्रोतों से खरीद के लिए अलग रखना होगा.

रक्षा उत्पादन से जुड़ी भारतीय कंपनियों की बल्ले-बल्ले : रक्षा पूंजीगत व्यय का 75% घरेलू कंपनियों से खरीदा भारत

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह.

नई दिल्ली:

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत 2023-24 में कुल रक्षा पूंजीगत व्यय का 75 प्रतिशत घरेलू रक्षा निर्माताओं से खरीद पर खर्च करेगा. यह विभिन्न हथियारों और सैन्य प्लेटफार्म के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय है. अधिकारियों ने ‘एयरो इंडिया' से इतर कहा कि इस कदम का मतलब अगले वित्त वर्ष के केंद्रीय बजट में घोषित कुल रक्षा पूंजी परिव्यय 1,62,600 करोड़ रुपये में से करीब एक लाख करोड़ रुपये घरेलू स्रोतों से खरीद के लिए अलग रखना होगा.

वहीं, ‘एयरो इंडिया' के दौरान 201 समझौता ज्ञापनों, 53 प्रमुख घोषणाओं, नौ उत्पाद पेश किया जाना और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) के तीन समझौते सहित लगभग 80,000 करोड़ रुपये की 266 साझेदारियां हुईं.

सिंह ने कहा, ‘‘यदि आप एक कदम उठाते हैं, तो सरकार 10 कदम आगे बढ़ने का वादा करती है. आपने विकास के पथ पर चलने के लिए जमीन की बात की थी. हम आपको पूरा आकाश प्रदान कर रहे हैं.'' सिंह ‘‘बंधन समारोह'' कार्यक्रम में बोल रहे थे जहां औपचारिक रूप से समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए. सिंह ने कहा, ‘‘तीन-चौथाई पूंजीगत खरीद बजट स्थानीय उद्योग के लिए निर्धारित करना उस दिशा में एक कदम है.''

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 से 2021-22 तक भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन का मूल्य 2.58 लाख करोड़ रुपये है. सरकार ने 2020-21 में, रक्षा पूंजी परिव्यय का 58 प्रतिशत भारतीय रक्षा उद्योग से खरीद के लिए रखा था. 2021-22 में इसे बढ़ाकर 64 फीसदी किया गया था. 2022-23 में आवंटन को और बढ़ाकर 68 प्रतिशत कर दिया गया.

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे रक्षा उद्योग में सरकार और समाज का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है. पिछले साल भारतीय विक्रेताओं से खरीद का हिस्सा 68 प्रतिशत था. 'अमृत काल' से प्रेरित होकर, उस हिस्से को सीधे बढ़ाकर 75 फीसदी कर दिया गया है.''

रक्षा मंत्री ने घरेलू उद्योगों के लिए आवंटन बढ़ाने के फैसले को घरेलू रक्षा क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ‘‘बहुत महत्वपूर्ण'' बताया. सिंह ने कहा, ‘‘इस कदम के बाद हमारा रक्षा उद्योग और भी उत्साह के साथ आगे बढ़ेगा और देश के रक्षा निर्माण क्षेत्र को और अधिक शक्तिशाली और समृद्ध बनाने में योगदान देगा.''

उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत खुशी की बात है कि एयरो-इंडिया 2023 इस अभूतपूर्व फैसले का गवाह बना.'' सिंह ने कहा कि एयरो-इंडिया 2023 ने सभी हितधारकों को यह संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया कि ‘‘हम अपनी प्रगति के पथ पर कहीं भी नहीं थकेंगे.''

रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘एयरो इंडिया' ने दुनिया को 'नए भारत' का 'नया रक्षा क्षेत्र' दिखाया, जो पिछले कुछ वर्षों में न केवल विकसित हुआ है, बल्कि अब अग्रणी देशों के रक्षा क्षेत्रों के साथ चलने के लिए पूरी तरह तैयार है.

उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि इस आयोजन ने भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूत करने का मार्ग प्रशस्त किया और इसे 'आत्मनिर्भरता' के एक नए युग की शुरुआत बताया. उन्होंने विश्वास जताया कि यह क्षेत्र नयी ऊर्जा और संकल्प के साथ प्रगति के पथ पर मजबूती से आगे बढ़ेगा.

बेंगलुरु के बाहरी इलाके में येलहंका वायुसेना स्टेशन परिसर में ‘एयरो इंडिया' के 14वें संस्करण का उद्घाटन सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और इसमें 700 से अधिक रक्षा कंपनियों और लगभग 100 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

सिंह ने कहा कि ‘एयरो इंडिया' के दौरान हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते भारत में रक्षा निर्माण के लिए एक नयी शुरुआत की सुविधा प्रदान करेंगे. उन्होंने कहा कि भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र में आज एक नया अध्याय शुरू हुआ है. उन्होंने कहा, ‘‘न हम किसी बाधा के सामने रुकेंगे, न किसी समस्या के सामने झुकेंगे. मुझे विश्वास है कि यह संकल्प हमारे मन में हमेशा बना रहेगा.''

सिंह ने कर्नाटक को उन राज्यों में से एक बताया जो देश की आर्थिक प्रगति में लगातार योगदान दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि ‘एयरो इंडिया' को आयोजित करने के लिए कर्नाटक से बेहतर जगह नहीं हो सकती क्योंकि राज्य ने अपने मजबूत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के साथ स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय उद्योगों को आकर्षित किया है.

‘एयरो इंडिया' कार्यक्रम का उद्देश्य हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए)-तेजस, एचटीटी-40, डॉर्नियर लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच), हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीएच) और उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) जैसे स्वदेशी प्लेटफार्म के निर्यात को बढ़ावा देना है.

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रक्षा मंत्रालय ने 2024-25 तक रक्षा निर्माण में 25 अरब अमेरिकी डालर (1.75 लाख करोड़ रुपये) के कारोबार का लक्ष्य रखा है जिसमें 5 अरब अमरीकी डालर (35,000 करोड़ रुपये) के सैन्य साजोसामान का निर्यात लक्ष्य शामिल है. पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं.