महाशिवरात्रि का उत्सव हो और सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन के जश्न का जिक्र न हो यह कैसे हो सकता है. इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी की रात मनाई जाएगी. ईशा योग केंद्र में होने वाले 33वें महाशिवरात्रि उत्सव की तैयारियां ज़ोरों पर हैं. इस साल 15 फरवरी 2026 को होने वाले इस भव्य कार्यक्रम में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि (Chief Guest) के रूप में शामिल होंगे. इस खास मौके पर उनके साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन और कई अन्य दिग्गज हस्तियां भी मौजूद रहेंगी.
क्या क्या होगा खास :
- पंच भूत क्रिया: उत्सव की शुरुआत ध्यानलिंग में 'पंच भूत क्रिया' से होगी, जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश जैसे पांच तत्वों के शुद्धिकरण का एक शक्तिशाली अनुष्ठान है.
- लिंग भैरवी महा यात्रा: इसके बाद दिव्य स्त्री शक्ति के सम्मान में एक भव्य जुलूस निकाला जाएगा.
- सांस्कृतिक और संगीत की महफिल: रात को यादगार बनाने के लिए कई कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे. इसमें आदित्य गढ़वी (गुजराती लोक संगीत), प्रशांत सोनग्रा और उनकी टीम (पारंपरिक ढोल), और ईशा का अपना बैंड 'साउंड्स ऑफ ईशा' शामिल हैं. इनके साथ स्वरूप खान, ब्लेज़ (Blaaze), पैराडॉक्स, स्वागत राठौड़ और पृथ्वी गंधर्व जैसे कलाकार लोक और आधुनिक संगीत का संगम पेश करेंगे.
- यक्ष महोत्सव: महाशिवरात्रि से पहले 'यक्ष' उत्सव में कर्नाटक गायक सिक्किल गुरुचरण (12 फरवरी), हिंदुस्तानी गायक राहुल देशपांडे (13 फरवरी) और भरतनाट्यम नृत्यांगना मीनाक्षी श्रीनिवासन (14 फरवरी) अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे.

पहली बार होगा योगेश्वर लिंग महा अभिषेक
इस साल की महाशिवरात्रि में कुछ बहुत खास होने जा रहा है. सद्गुरु पहली बार खुद 'योगेश्वर लिंग महा अभिषेक' करेंगे. यह एक निःशुल्क और पवित्र अनुष्ठान है, जिससे दुनिया भर के भक्त लाइव जुड़ सकेंगे.
एक और बड़ा आकर्षण 'आदियोगी दिव्य दर्शनम' होगा. यह 112 फीट ऊंची आदियोगी की प्रतिमा पर होने वाला एक शानदार लाइट एंड साउंड शो है. इसमें सद्गुरु खुद योग की शुरुआत की कहानी सुनाएंगे.
आधी रात का ध्यान और ऊर्जा का संचार
सद्गुरु रात 12 बजे 'महामंत्र' की दीक्षा देंगे और फिर सुबह ब्रह्म मुहूर्त (3:40 AM) में एक शक्तिशाली ध्यान (Meditation) कराएंगे. महाशिवरात्रि की रात ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है कि मानव शरीर में ऊर्जा कुदरती रूप से ऊपर की ओर बढ़ती है.
सद्गुरु कहते हैं -
"हम वेल्लियांगिरी पहाड़ियों की तलहटी में हैं, जिसे 'दक्षिण का कैलाश' कहा जाता है. 11 डिग्री अक्षांश (latitude) पर स्थित होने के कारण यहां ऊर्जा का उभार सबसे अधिक होता है, जो महाशिवरात्रि की रात अपने चरम पर होता है. इसलिए इस रात के लिए यह दुनिया की सबसे अच्छी जगह है."
कैसे जुड़ें इस उत्सव से?
सद्गुरु के मार्गदर्शन में होने वाली यह पूरी रात भक्ति, संगीत और ध्यान के नाम होगी. इस कार्यक्रम को 100 से ज्यादा टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 23 भारतीय और विदेशी भाषाओं में लाइव दिखाया जाएगा. उम्मीद है कि दुनिया भर के 14 करोड़ से ज्यादा लोग इस मेगा इवेंट का हिस्सा बनेंगे. यह 12 घंटे लंबा कार्यक्रम 15 फरवरी शाम 6 बजे से शुरू होगा. आप सद्गुरु के यूट्यूब चैनल और प्रमुख न्यूज़ चैनलों पर इसे 23 भाषाओं में लाइव देख सकते हैं.
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