यह ख़बर 25 जुलाई, 2014 को प्रकाशित हुई थी

डब्ल्यूटीओ समझौते पर भारत अपने कड़े रुख पर कायम

डब्ल्यूटीओ के डायरेक्टर जनरल राबर्टो एजेवेदो

नई दिल्ली:

भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के व्यापार सुगमता करार (टीएफए) पर अपने कड़े रुख पर कायम रहने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया।

भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी खाद्य सुरक्षा चिंता दूर होने तक डब्ल्यूटीओ के व्यापार सुगमता के बाली करार पर आगे नहीं बढ़ेगा। भारत ने कहा है कि वह इस मामले में विकसित देशों के दबाव में नहीं आएगा।

एक सूत्र ने कहा, मंत्रिमंडल ने आज इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया। उच्च स्तर पर फैसला किया गया है कि टीएफए पर भारत अपने कड़े रुख पर कायम रहेगा। डब्ल्यूटीओ की 160 सदस्यीय आम परिषद की आज जिनीवा में बैठक हो रही है, जिसमें व्यापार सुगमता करार को अपनाने व इस मुद्दे पर भारत के रुख पर विचार-विमर्श होगा। इस मामले में भारतीय रुख काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की मंजूरी के बिना टीएफए को अपनाना कठिन होगा।

बाली पैकेज के क्रियान्वयन को लेकर अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया जैसे अमीर देशों व भारत व दक्षिण अफ्रीका तथा अन्य उभरते देशों के बीच काफी मतभेद हैं। जहां विकसित देश टीएफए पर करार को अपनाने के लिए दबाव डाल रहे हैं, वहीं भारत चाहता है कि पहले उसके खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के मुद्दे का स्थायी समाधान निकाला जाए।

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डब्ल्यूटीओ के मौजूदा नियमों के तहत खाद्य सब्सिडी कुल खाद्यान्न उत्पादन के मूल्य का 10 प्रतिशत तक तय है, लेकिन इसकी गणना दो दशक पुराने मूल्य पर की जाती है मौजूदा मूल्य पर नहीं। भारत खाद्य सब्सिडी का आधार वर्ष (1986) बदलने की मांग कर रहा है। अमेरिका जहां खाद्य सब्सिडी के रूप में 120 अरब डॉलर देता है वहीं भारत सिर्फ 12 अरब डॉलर की खाद्य सब्सिडी देता है।