खास बातें
- आंकड़ों के अनुसार जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक एफडीआई का आना हुआ है उनमें होटल एवं पर्यटन (2.32 अरब डॉलर), फार्मास्युटिकल्स (98.7 करोड़ डॉलर), सेवा क्षेत्र (23.8 करोड़ डॉलर), रसायन (5.1 करोड़ डॉलर) और निर्माण (3.2 करोड़ डॉलर) शामिल हैं।
नई दिल्ली: देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वर्ष दर वर्ष आधार पर अप्रैल में 25 प्रतिशत बढ़कर 2.32 अरब डालर हो गया जो पिछले छह महीनों में सर्वाधिक है।
औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2012 में भारत में 1.85 अरब डॉलर का एफडीआई आया था। सितंबर 2012 में विदेशी निवेश 4.67 अरब डॉलर का हुआ था।
आंकड़ों के अनुसार जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक एफडीआई का आना हुआ है उनमें होटल एवं पर्यटन (2.32 अरब डॉलर), फार्मास्युटिकल्स (98.7 करोड़ डॉलर), सेवा क्षेत्र (23.8 करोड़ डॉलर), रसायन (5.1 करोड़ डॉलर) और निर्माण (3.2 करोड़ डॉलर) शामिल हैं।
भारत ने सर्वाधिक एफडीआई सिंगापुर से (1.29 अरब डॉलर का) प्राप्त किया जिसके बाद मॉरीशस से 35.5 करोड़ डॉलर, नीदरलैंड से 17.3 करोड़ डॉलर और अमेरिका से 14.9 करोड़ डॉलर का विदेशी निवेश आया। सरकारी अधिकारियों के अनुसार सरकार के द्वारा उठाए गए कदम के कारण एफडीआई को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
यह एफडीआई वर्ष 2012.13 में कुल मिलाकर 22.42 अरब डॉलर का था जो वर्ष 2011.12 के 36.50 अरब डॉलर से गिरावट को प्रदर्शित करता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा और वित्त मंत्री पी चिदंबरम विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए अमेरिका भी गए थे।
सितंबर 2012 से सरकार द्वारा नागर विमानन, खुदरा क्षेत्र जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एफडीआई व्यवस्था को उदारीकृत करने की भी उम्मीद है।
सरकार के द्वारा दूरसंचार एवं रक्षा जैसे क्षेत्रों में एफडीआई व्यवस्था को और उदारीकृत किए जाने की उम्मीद है।
वित्त मंत्रालय ने चाय, मीडिया, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे क्षेत्रों में एफडीआई की सीमा में परिवर्तन करने का भी प्रस्ताव किया है।
भारत को बंदरगाह, हवाईअड्डा और राजमार्ग जैसे अपने आधारभूत ढांचा क्षेत्रों को पूरी तरह से दुरुस्त करने के लिए अगले पांच वर्ष में करीब 1,000 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी।
एफडीआई में वृद्धि गिरते रुपये के लिए एक अच्छा समाचार है जो इस माह के आरंभ में 61.21 रुपये प्रति डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गया था।