यह ख़बर 18 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

डायरेक्ट सेलिंग के लिए नोडल मंत्रालय बने : ICRIER

खास बातें

  • भारत में डायरेक्ट सेलिंग कारोबार के वर्ष 2013 तक 71,500 करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है।
New Delhi:

भारतीय डायरेक्ट सेलिंग बाजार के वृद्धि की गति को बनाए रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप और नियमन हेतु एक नोडल मंत्रालय की जरूरत है। यह बात आईसीआरआईईआर के अध्ययन में कही गयी है। भारत में डायरेक्ट सेलिंग कारोबार के वर्ष 2013 तक 71,500 करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है। डायरेक्ट सेलिंग का समाजिक और आर्थिक प्रभाव :एक प्रोत्साहन नीति की जरूरत रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को डारेक्ट सेलिंग को स्पष्ट तौर पर परिभाषित करनी चाहिए और इसे उद्योग का दर्जा देना चाहिए। सर्वे आधारित आईसीआरआईईआर की रपट में कहा गया है इस क्षेत्र के विकास में अनेक बाधाएं है,जिसमें से कुछ का समाधान डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां कर सकती हैं, लेकिन अन्य समस्याओं को दूर करने ेके लिए सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत पड़ेगी। एक नोडल मंत्रालय बनाने की भी बात कही गयी है। सर्वे में कहा गया है चूंकि डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों को यह पता नहीं होता है कि वे उपभोक्ता मंत्रालय द्वारा शासित हैं या खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा या अन्य कोई मंत्रालय द्वारा। इसमें कहा गया है कि इस क्षेत्र को उद्योग का दर्जा मिलने से कंपनियों में सुरक्षा और वैधता की भावना बढ़ेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि डायरेक्ट सेलिंग का वर्गीकरण स्पष्ट नहीं है और इसमें विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रोत्साहित करने के लिए स्पष्ट परिभाषा की जरूरत है। सीमित मात्रा में मल्टी ब्रांड में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की मंजूरी दी जाती है तो इस क्षेत्र को फायदा पहुंचेगा।


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