भारतीय रेलवे का डाटा 2020 और 2019 में भी चोरी हुआ था.
नई दिल्ली: देश में एक बार फिर सरकार से जुड़ी सेवा प्रदाता कंपनी आईआरसीटीसी या फिर रेलवे की किसी अन्य साइट से डाटा चोरी हो गया है. ऐसी खबरें बुधवार को कुछ वेबसाइटों पर दिखाई दी और लोगों के होश उड़ गए. एक हैकर ने रेलवे की सेवा का प्रयोग कर रहे करीब 3 करोड़ लोगों के डेटा चुराने का दावा ही नहीं किया बल्कि वह इसे बेचने में भी लग गया. मीडिया रिपोर्ट के हवाले से यह बताया जा रहा था कि डाटा चोर ने दावा किया है कि इस चोरी में उसके पास यूजर नेम, ईमेल, वेरिफाइड फोन नंबर, अनवेरिफाइड मोबाइल नंबर, शहर, राज्य और यूजर की भाषा प्राथमिकता की सूचना है. साथ ही डाटा चोर ने यह भी दावा किया है कि उसके हाथ इस चोरी में हजारों सरकारी ई-मेल, खास लोगों की डिटेल भी लगे हैं. साथ ही कुछ वीआईपी लोगों के डिटेल भी वह हैक करने में कामयाब रहा है.
शैडोहैकर नाम के इस युवक ने एक ट्वीट के जरिए संपर्क करने का रास्ता भी सुझाया था. इसके अलावा इस हैकर के बारे में कोई ज्यादा जानकारी नहीं है. हैकर का दावा था कि दिसंबर 27 यानि मंगलवार को ही उसने यह किया है और करीब 30 मिलियन रेलवे के उपभोक्ताओं का डाटा उसने चुराया है.
बता दें इसकी जानकारी तब लगी जब एक हैकर फोरम में 30 मिलियन भारतीय रेलवे के यूजर के रिकॉर्ड बिक्री के लिए डाले जाने की सूचना मिली.
यह भी उल्लेखनीय है कि हैकर ने यह भी साफ नहीं किया है कि उसने यह डाटा आईआरसीटीसी की साइट का चोरी किया है या फिर किसी अन्य रेलवे की साइट का डाटा चुराया है.
इस पूरी खबर के दिनभर साइटों में रहने के बाद शाम को रेलवे की ओर से इन खबरों का खंडन सामने आया. रेलवे ने कहा कि रेलवे से जुड़ा कोई भी डाटा चोरी नहीं हुआ है. जो भी जानकारी उपभोक्ताओं की उसके पास है वह पूरी तरह सुरक्षित है. रेलवे ने कहा कि न ही आईआरसीटीसी के सर्वर और न ही रेलवे के सर्वर से कोई जानकारी लीक हुई है. सर्वर को किसी प्रकार से हैक नहीं किया गया है.
जानकारी के लिए बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि रेलवे का डाटा चोरी हुआ है. 2020 में भारतीय रेल से जुड़े डाटा ऑनलाइन मिला था. यहां पर भी करीब 9 मिलियन लोगों की निजी जानकारी ऑनलाइन देखी गई थी. तब तह भी पाया गया था 2019 में इस प्रकार एक और चोरी हुई थी जिसमें लाखों यूजर्स का डाटा चोरी हो गया था.