जीएसटी : करदाता इकाइयों पर अधिकार को लेकर नहीं बन सकी सहमति, अगली बैठक 24-25 नवंबर को

जीएसटी : करदाता इकाइयों पर अधिकार को लेकर नहीं बन सकी सहमति, अगली बैठक 24-25 नवंबर को

खास बातें

  • केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न अधिकार क्षेत्र को लेकर सहमति नहीं बनी
  • जीएसटी को एक अप्रैल 2016 से लागू करने के प्रयासों को झटका लग सकता है
  • राज्यों के वित्त मंत्रियों की इस मुद्दे पर बैठक अब 20 नवंबर को
नई दिल्ली:

वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) प्रणाली के लिए चार स्तरीय कर दरें तय करने के बाद शुक्रवार को केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न करदाता इकाइयों पर अधिकार क्षेत्र को लेकर सहमति नहीं बन सकी. इससे जीएसटी को एक अप्रैल 2016 से लागू करने के प्रयासों को झटका लग सकता है.

जीएसटी लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली जीएसटी परिषद की आज दूसरे दिन की बैठक में करदाता इकाइयों पर अधिकार क्षेत्र को लेकर सहमति नहीं बन सकी. किस तरह की इकाइयां राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आयेंगी और किस तरह की इकाइयों पर पर केंद्र सरकार का अधिकार होगा, इस बारे में कोई निर्णय नहीं हो सका.

परिषद की कल से शुरू हुई दो दिवसीय बैठक के पहले दिन कल जीएसटी के लिए पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत की चार स्तरीय कर दरों का अहम फैसला किया गया. परिषद की अब 9 और 10 नवंबर को होने वाली बैठक को निरस्त कर दिया गया है. इस बैठक में जीएसटी को समर्थन देने वाले विधेयकों के मसौदों को अंतिम रूप दिया जाना था. राज्यों के वित्त मंत्रियों की इस मुद्दे पर अब 20 नवंबर को अनौपचारिक बैठक होगी. वित्त मंत्री अरण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की अगली बैठक अब 24-25 नवंबर को होगी.

जेटली ने इससे पहले उम्मीद जताई थी कि जीएसटी से जुड़े दूसरे विधेयकों को 22 नवंबर तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा. हालांकि, आज की बैठक में इस संबंध में निर्णय नहीं होने के बावजूद उन्हें अभी भी उम्मीद है कि इन विधेयकों को 16 नवंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में पारित करा लिया जाएगा.  
 
जेटली ने कहा कि केंद्रीय जीएसटी, एकीकृत जीएसटी और राज्य जीएसटी तथा क्षतिपूर्ति विधेयकों के मसौदे राज्यों को 15 नवंबर के बाद भेज दिए जाएंगे. उसके बाद 24-25 नवंबर की बैठक में जीएसटी परिषद इन्हें मंजूरी दे देगी. इस दौरान अधिकार क्षेत्र से जुड़े मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए वित्त मंत्रियों की एक अनौपचारिक बैठक 20 नवंबर को होगी.

वित्त मंत्री ने कहा कि मामला काफी पेचीदा है इसलिए केंद्र और राज्य जल्दबाजी नहीं करना चाहते हैं क्योंकि परिणाम के बारे में अभी पता नहीं है. सूत्रों के मुताबिक केंद्र का मानना है कि अधिकार क्षेत्र के मामले में समानांतर व्यवस्था इकतरफा रहेगी. सेवाकरदाताओं में 93 प्रतिशत और वैट देने वाले 85 प्रतिशत करदाताओं का सालाना कारोबार डेढ करोड़ से कम है.
 
जीएसटी परिषद यह भी मानती है कि वस्तु एवं सेवाओं के बीच स्पष्ट अंतर करना भी काफी मुश्किल काम है क्योंकि कार्य अनुबंध, निर्माण अनुबंध और रेस्तरां आदि ऐसे क्षेत्र हैं जहां वैट और सेवाकर दोनों लगते हैं. जेटली ने कहा कि 22 सितंबर के बाद से जीएसटी परिषद ने 10 महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं.

कर अधिकार क्षेत्र के बारे में जेटली ने कहा कि कोई एक करदाता कई अधिकारियों की ओर से आकलन का पात्र नहीं हो सकता है. वित्त मंत्री ने कहा कि राज्यों ने सेवाकर दाताओं के बारे में जानकारी मांगी है. जीएसटीएन इन आंकडों को अद्यतन कर रहा है. जीएसटी परिषद पहले ही यह निर्णय कर चुकी है कि 20 लाख रपये सालाना कारोबार करने वाले व्यापारियों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाएगा.

डेलायट हास्किंस एण्ड सेल्स एलएलपी के भागीदार प्रशांत देशपांडे ने कहा कि केंद्रीय जीएसटी, एकीकृत जीएसटी और राज्य जीएसटी के मसौदे 14--15 नवंबर तक तैयार हो जाएंगे और उन्हें सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध करा दिया जाएगा.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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