नई दिल्ली:
सरकार ने आवास सहित समूचे निर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में आज ढील दे दी। सरकार ने इस तरह की परियोजनाओं में विदेशी निवेश के लिए पूंजीगत आवश्यकता और न्यूनतम निर्मित क्षेत्र घटा दिया है। इसके साथ ही सरकार ने बाहर निकलने के नियमों को भी सरल बनाया है।
सरकार के इस कदम से नकदी संकट से जूझ रहे रीयल एस्टेट क्षेत्र को पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी। सूत्रों ने कहा कि आज हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
मंत्रिमंडल ने निर्माण परियोजनाओं में एफडीआई के लिए न्यूनतम निर्मित क्षेत्र की जरूरत 50,000 वर्ग मीटर से घटाकर 20,000 वर्ग मीटर करने का निर्णय किया है। इसके अलावा, न्यूनतम पूंजीगत आवश्यकता भी एक करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी गई है।
सर्विस्ड प्लॉट के विकास के मामले में न्यूनतम 10 हेक्टेयर भूमि की शर्त भी पूरी तरह से हटा ली गई है। हालांकि टाउनशिप, आवास एवं निर्मित ढांचे व निर्माण विकास में 2005 से ही 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है, पर सरकार ने इसमें कुछ शर्तें रखी हैं।
बयान में कहा गया, 'इन उपायों से निर्माण विकास क्षेत्र में धन का प्रवाह बढ़ने की संभावना है। इससे नए क्षेत्रों में निवेश आकषिर्त होने एवं शहरी समुदायों के आसपास जमीन की कमी एवं जमीन के उंचे मूल्य को देखते हुए सर्विस्ड हाउसिंग के लिए भूखंडों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।'