यह ख़बर 22 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

कोयला खदानों में 10.7 लाख करोड़ का घोटाला, संसद में हंगामा

खास बातें

  • कैग रिपोर्ट से उजागर हुए देश के अब तक के सबसे बड़े घोटाले को लेकर बहस कराने की मांग पर गुरुवार को संसद के दोनों सदनों में जोरदार हंगामा हुआ, और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
नई दिल्ली:

केन्द्र में सत्तारूढ़ यूपीए सरकार की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब कैग की रिपोर्ट से उजागर हुए देश के अब तक के सबसे बड़े घोटाले को लेकर बहस कराने की विपक्ष की मांग पर गुरुवार को संसद के दोनों सदनों में जोरदार हंगामा हुआ, और आखिरकार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) का कहना है कि घोटाले से राजकोष को 10.67 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के मुताबिक 2-जी स्पैक्ट्रम नीलामी में हुए एक लाख 76 हजार करोड़ के घोटाले से तकरीबन छह गुना बड़ा घोटाला 150 कोयला खदानों की नीलामी में हुआ। घोटाले की अनुमानित रकम 10 लाख 67 हजार करोड़ बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2004 से लेकर 2009 के बीच तकरीबन 100 प्राइवेट और कुछ पब्लिक सेक्टर कंपनियों को इन खदानों में बिना नीलामी के ही खनन की इजाजत दे दी गई। कोयला खदान घोटाले में इन कंपनियों ने अनुमान के मुताबिक सरकारी खजाने को तकरीबन 10 लाख 67 लाख करोड़ की चपत लगाई।

घोटाले का फायदा 100 से अधिक प्राइवेट कंपनियों के अलावा कुछ पब्लिक सेक्टर यूनिटों ने भी उठाया। घोटाले से फायदा उठाने वाली प्राइवेट सेक्टर कंपनी की बात करें तो उसमें स्ट्रेटजिक एनर्जी टेक सिस्टम लिमिटेड को 33 हजार 60 करोड़ के फायदे का अनुमान है।

इलैक्ट्रो स्टील कास्टिंग एंड अदर्स को 26 हजार तीन सौ बीस करोड़, जिंदल स्टील एंड पॉवर लिमिटेड को 21 हजार 226 करोड़, भूषण स्टील जय बालाजी लिमिटेड और रश्मी सीमेंट को 15 हजार 967 करोड़, टाटा स्टील लिमिटेड को 7 हजार 161 करोड़, छत्तीसगढ़ केपटिव कोल को लिमिटेड को 7 हजार 23 करोड़ के फायदे की बात कही गई है। प्राइवेट सेक्टर की तकरीबन जिन 100 कंपनियों को इस घोटाले में फायदा पहुंचने की बात कही गई है वह पॉवर स्टील और सीमेंट उद्योग से जुड़ी हुई हैं

कोयला मंत्रालय के 155 कोयला खदानों को नीलाम न करने से पब्लिक सेक्टर यूनिट्स जैसे एनटीपीसी समेत कुल 10 कंपनियों को हजारों करोड़ का फायदा पहुंचा। कैग की इस रिपोर्ट के मुताबिक कई पब्लिक सेक्टर कंपनियों ने भी कोयला खदानों की इस धांधली में जमकर फायदा उठाया। रिपोर्ट के मुताबिक इस घोटाले से पब्लिक सेक्टर कंपनी को एनटीपीसी को 35 हजार 24 करोड़, टीएनईबी एंड एमएसएमसीएल को 26 हजार 584 करोड़, एमएमटीसी को 18 हजार 628 करोड़ का, सीएमडीसी को 16 हजार 498 करोड़, जेएसएमडीसीएल को ग्यारह हजार 988 करोड़ का फायदा पहुंचा। यह तो महज कुछ नाम है जबकि इस घोटाले से फायदा उठाने वाली कंपनियों की फेहरिस्त काफी लंबी है।

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माना जा रहा है कि संसद में आम बजट के पास होने के बाद कैग की इस रिपोर्ट को सामने रखा जा सकता है। 110 पेज की इस रिपोर्ट में 2004 से लेकर 2009 के बीच तकरीबन 33 हजार 169 मिलियन टन कोयले के अवैध खनन का अनुमान है। जानकारों के मुताबिक यह अवैध खनन इतना है कि इससे से देश में अगले पचास साल तक कोयले की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।