यह ख़बर 22 नवंबर, 2013 को प्रकाशित हुई थी

काले धन के खिलाफ लड़ाई में भारत को और बल मिला

जकार्ता / नई दि्ल्ली:

काले धन के खिलाफ भारत की लड़ाई को उस समय बड़ा बल मिला, जब लिश्टेंस्टाइन सहित चार और विदेशी न्यायिक क्षेत्रों ने अपनी बैंकिंग गोपनीयता को छोड़ने का फैसला किया, जिससे कर सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान की अनुमति मिल गई।

पेरिस स्थित आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) द्वारा तैयार वैश्विक सम्मेलन पर लिश्टेंस्टाइन, आइल ऑफ मैन, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, केमैन आइलैंड ने हस्ताक्षर किए हैं। ये सभी न्यायिक अधिकार क्षेत्र कर अधिकारियों के जांच दायरे में आए हुए थे।

ओईसीडी के बयान में कहा गया है कि कर मामलों में साझा प्रशासनिक सहयोग पर बहुपक्षीय सम्मेलन पर लिश्टेंस्टाइन 62वां तथा सैन मेरिनो 63वां हस्ताक्षरकर्ता है। इसके अनुसार अब आइल ऑफ मैन, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, केमैन आइलैंड, जिब्राल्टर आदि पर भी इस समझौते के दायरे में आ गए हैं। यह घोषणा जकार्ता में ओईसीडी के एक सम्मेलन के पहले दिन की गई।

वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने नई दिल्ली में कहा कि लिशटेंस्टाइन के इस कदम से विदेशों में काले धन की घटनाओं के खिलाफ भारत के प्रयासों को बल मिलेगा। भारतीय जांच एजेंसियों के सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें भारत से व्यक्ति या फर्म को अपनी अवैध आय या गुप्त कोष को छिपाने के लिए लिशटेंस्टाइन के बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल करते पाया गया।

इस समझौते पर हस्ताक्षर के साथ ही लिश्टेंस्टाइन ने एक तरह से अपनी गोपनीयता की दीवारों को गिरा दिया है और भारत जैसे देशों को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या फर्म के बारे में जानकारी हासिल करने की अनुमति दी है।


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