फिच ने रेटिंग घटाने का निर्णय केवल नवीनतम ऋण सीमा गतिरोध के कारण नहीं लिया है, बल्कि "राजकोषीय और ऋण मामलों" के संबंध में पिछले 20 वर्षों में शासन के मानकों में लगातार गिरावट" के कारण भी ऐसा किया है. वहीं, फिच के इस कदम पर बाइडन प्रशासन के अधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
रेटिंग में कमी के पीछे अपने तर्क को समझाते हुए फिच ने कहा, 'अगले तीन साल में राजकोषीय स्थिति में गिरावट, सरकार पर कर्ज का बोझ बढ़ने और पिछले दो दशकों में 'एए' और 'एएए' रेटिंग वाले समकक्षों की तुलना में शासन में गिरावट का जिक्र किया गया है.
अमेरिका के वित्त मंत्री जेनेट येलेन ने एक बयान में कहा, "मैं फिच रेटिंग्स के फैसले से पूरी तरह असहमत हूं." उन्होंने कहा, 'फिच रेटिंग्स की ओर से किया गया बदलाव मनमाना और पुराने आंकड़ों पर आधारित है.'
आइए समझें फिच के ऐसा करने के प्रमुख कारण क्या है -
बढ़ता ऋण
अमेरिकी सरकार पर पिछले कुछ सालों में लगातार ऋण बढ़ता जा रहा है. आज की तारीख में विश्व युद्ध के बाद से सर्वाधिक ऋण है.
सरकार के संचालन के स्तर में गिरावट
फिच ने अमेरिका में सरकार के संचालन के स्तर में गिरावट का हवाला भी दिया है. ऐसे में ही सांसदों में हाल ही ऋण विवाद देखने को मिला था. इसे सरकार की नाकामी के तौर पर देखा जा रहा है. इससे सरकार का वित्तीय ध्येय को समय पर पूरा करने में विफलता के तौर पर देखा गया है.
मंदी की पूरी संभावना
फिच का मानना है कि अमेरिका के आर्थिक हालात अभी भी अच्छे नहीं हुए हैं. उनका मानना है कि आर्थिक सुस्ती, महंगाई और मंदी की संभावना बनी हुई है. इससे देश के वित्तीय व्यवस्था पर बोझ बना हुआ है.
एएए से रेटिंग गिराकर कर एए+ कर दी गई है. यह अभी भी काफी मजबूत रेटिंग मानी जाती है.
क्या होगा असर
ऐसे हालातों में रेटिंग के गिरने का व्यापक असर हो सकता है. इसमें -
ऋण के लिए महंगा ब्याज
रेटिंग गिरने की वजह से सरकार को अपने ऋण पर ज्यादा ब्याज देना होगा. सरकार को आगे जो ऋण मिलेगा वह भी महंगा होगा. साथ ही सरकार के बजट में घाटा बढ़ने के आसार हैं.
अर्थव्यवस्था में विश्वास की कमी
रेटिंग गिरने से अर्थव्यवस्था में विश्वास की कमी आ जाती है. इसका असर निवेशकों पर सीधा पड़ता है. ऐसे में बिजनेस करने के लिए फंड जुगाड़ना मुश्किल हो जाएगा.
बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी
रेटिंग गिरने का एक असर यह होगा की बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी. इस वित्त प्रबंधन में दिक्कत आएगी. भविष्य के लिए बिजनेस प्लान डगमगा सकता है.
उल्लेखनीय है कि यह दूसरी बार है जब किसी रेटिंग एजेंसी ने अमेरिका की रेटिंग गिराई है. इससे पहले 2011 में स्टैंडर्ड और पूअर्स ने तब सरकार में ऋण को लेकर हुए विवाद के बाद एएए की रेटिंग घटा दी थी.
बता दें कि इस प्रकार की रेटिंग गिरने के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था के बड़े साइज की वजह से हालात ज्यादा बिगड़े नहीं थे. ऐसे में वैश्विक निवेशक सरकारी ट्रेजरी में निवेश कर पैसा सुरक्षित कर लेते हैं.
खास बात यह है कि 24 मई को फिच ने अमेरिकी सरकार को रेटिंग घटाने से संबंधित चेतावनी दी थी.