खास बातें
- पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में लिप्त दो कंपनियों की 2-2 हजार करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की जाएंगी।
New Delhi: प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में लिप्त दो कंपनियों की 2-2 हजार करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की जाएंगी। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एके गांगुली की पीठ के समक्ष प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने कहा, इन कंपनियों से जुड़ी 2,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क की जाएगी। सीलबंद लिफाफे में प्रवर्तन निदेशालय की ताजा रपट में दिए गए तथ्यों को पढ़ते हुए वेणुगोपाल ने हालांकि कंपनियों के नाम नहीं लिए, लेकिन आश्वासन दिया कि कुर्की की कार्रवाई जल्द ही शुरू की जाएगी और दो महीने में यह पूरी हो जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि प्रवर्तन निदेशालय को जिन दो कंपनियों के खिलाफ अभी तक शिकायतें मिली हैं, उनके खिलाफ मनी लांडरिंग रोधी कानून और फेमा के तहत कुर्की के आदेश जल्द ही जारी किए जाएंगे। वेणुगोपाल ने कहा, शिकायतों में जिन कंपनियों के नामों का उल्लेख है, उनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई दो महीने में पूरी कर ली जाएगी। हमें उनकी संपत्तियों का ब्यौरा एकत्र करना है क्योंकि कई कंपनियों के पास बेनामी संपत्तियां हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी रपट में कहा कि 2जी घोटाले में शामिल पांच विदेशी कंपनियों के संबंध में जांच का काम प्रगति पर है। ये कंपनियां वर्जिन आईलैंड में पंजीकृत हैं। इस पर पीठ ने पूछा, इस पर आरबीआई का क्या रुख है वेणुगोपाल ने जवाब दिया, अभी तक प्रवर्तन निदेशालय ने इस बारे में रिजर्व बैंक को पत्र नहीं लिखा है और आगे जांच की जाएगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि 4,000 करोड़ रुपये के फेमा उल्लंघन के संबंध में कार्रवाई की गई है और शिकायत दर्ज की गई है। जैसे जैसे जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी यह राशि और बढेगी तथा कुर्की होगी। प्रवर्तन निदेशालय ने घोटाले के संबंध में पैसे के लेनदेन का ब्यौरा दिया और कहा कि शाहिद उस्मान बलवा की डीबी रीयल्टी से जुड़ी कंपनियों ने इस संबंध में 1,400 करोड़ रुपये के लेन देन किए हैं। वेणुगोपाल ने 2जी लाइसेंस मिलने के बाद विभिन्न कंपनियों के बीच धन के लेनदेन के संदर्भ में कहा, ये कंपनियां डीबी रीयल्टी से जुड़ी हैं। एक रीयल एस्टेट कंपनी से धन निकलना शुरू हुआ। 1,400 करोड़ रुपये उपर से नीचे तक गया और फिर मूल स्रोत के पास पहुंचा। इस बीच, सीबीआई ने अपनी जांच के बारे में नयी स्थिति रपट पेश करते हुए 2001 से 2007 के दौरान स्पेक्ट्रम आबंटन से जुड़ी जांच पूरी करने के लिए न्यायालय से और समय मांगा। पीठ ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई जांच की सराहना की और कहा कि इन्होंने एक प्रशंसनीय कार्य किया है।