नई दिल्ली: नागर विमानन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) ने ड्रोन एवं ड्रोन कलपुर्जों (Drone and Drone parts) से संबंधित उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई PLI) के लिए परिचालन दिशा-निर्देश अधिसूचित किए हैं. सरकार ने इस क्षेत्र के लिए 120 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ पीएलआई योजना को मंजूरी दी है और यह योजना 2022-23 से 2024-25 की अवधि के दौरान लागू की जानी है. मंत्रालय ने 29 नवंबर को कहा था कि उद्योग के प्रतिनिधियों समेत हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करके दिशा-निर्देश तय कर लिए गए हैं.
इस योजना का लाभ केवल उन कंपनियों को ही मिल पाएगा जो भारत में ड्रोन और ड्रोन घटकों के विनिर्माण का काम करती हैं. प्रति विनिर्माता कुल पीएलआई अधिकतम 30 करोड़ रुपये है जो कुल वित्तीय परिव्यय का 25 फीसदी है.
ड्रोन विनिर्माण करने वाले एमएसएमई क्षेत्र के वे उपक्रम और स्टार्टअप जिनका वार्षिक बिक्री कारोबार दो करोड़ रुपये है वे इस योजना का लाभ उठा सकेंगे.
गौरतलब है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने Make in India कार्यक्रम के तहत ड्रोन के उत्पादन पर भी जोर दिया है. केंद्र ने कुछ बातों को छोड़ कर ड्रोन (Drones) के आयात पर पाबंदी लगा दी थी. यह पाबंदी साल के आरंभ में फरवरी माह में लगाई गई थी.
उल्लेखनीय है कि ड्रोन के अलग अलग प्रकार होते हैं जिनका प्रयोग रक्षा से लेकर कृषि तक के क्षेत्र में किया जा सकता है और बेहतर परिणाम अर्जित किए जा सकते हैं. भारत में ड्रोन को गैरवाजिब इस्तेमाल से सुरक्षा तंत्र पर भी खतरा खड़ा हुआ जिसके बाद सरकार हरकत में आई और फिर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई. नई नीति में इस प्रकार की समस्या के समाधान के प्रयास पर भी सरकार का जोर है.