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धुरंधर की कामयाबी क्या दक्षिण की पैन इंडिया फिल्मों के लिए खतरा ?

पिछले साल की चर्चित फिल्म धुरंधर के बाद अब इसके अगले भाग धुरंधर 2 को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. फिल्म के दूसरे हिस्से को लेकर चर्चा तेज है और इसके साथ ही पैन-इंडिया फिल्मों की दौड़ को लेकर भी बहस शुरू हो गई है.

धुरंधर की कामयाबी क्या दक्षिण की पैन इंडिया फिल्मों के लिए खतरा ?
धुरंधर की कामयाबी क्या दक्षिण की पैन इंडिया फिल्मों के लिए खतरा ?

पिछले साल की चर्चित फिल्म धुरंधर के बाद अब इसके अगले भाग धुरंधर 2 को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. फिल्म के दूसरे हिस्से को लेकर चर्चा तेज है और इसके साथ ही पैन-इंडिया फिल्मों की दौड़ को लेकर भी बहस शुरू हो गई है. फिल्म निर्देशक श्रीराम राघवन का कहना है कि हिंदी सिनेमा हमेशा से पूरे देश में देखा जाता रहा है, इसलिए पैन-इंडिया की चर्चा कोई बिल्कुल नई बात नहीं है.

उन्होंने कहा,“हिंदी फिल्म इंडस्ट्री तो हमेशा से ही पूरे देश में देखी जाती रही है. पहले भी हिंदी फिल्में हर राज्य में पहुंचती थीं. फर्क बस इतना है कि आजकल हर चीज को कमाई के आंकड़ों से मापा जाने लगा है कि किस फिल्म ने कितना पैसा कमाया.” राघवन के मुताबिक सिनेमा की असली ताकत उसकी कहानी में होती है. उन्होंने कहा, “सबसे जरूरी बात यह है कि ऐसी फिल्में बनें जो लोगों के दिल में लंबे समय तक रहें और अच्छी कहानियां लेकर आएँ.”

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की निर्माता अवंतिका रंजीत इस स्थिति को प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि प्रेरणा के रूप में देखती हैं. उन्होंने कहा, “जब हम सिनेमा हॉल जाते हैं तो देखते हैं कि सुबह के शो से लेकर देर रात के शो तक दर्शक मौजूद रहते हैं. इसलिए मैं इसे खतरे की तरह नहीं बल्कि प्रेरणा की तरह देखती हूँ. प्रतिस्पर्धा हमें बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करती है.” उन्होंने यह भी कहा कि अब दर्शक भाषा की सीमाओं से आगे बढ़ चुके हैं. “आज लोग सिर्फ अपनी भाषा की फिल्में ही नहीं देखते. वे उपशीर्षकों के साथ दूसरी भाषाओं की फिल्में भी देखने के लिए तैयार हैं.”

फिल्म निर्माता सुजाता का मानना है कि किसी एक फिल्म की सफलता पूरे बाजार को नहीं बदलती. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि कोई एक फिल्म पूरे बाजार को खत्म कर सकती है. कई बार एक फिल्म दूसरी फिल्मों के लिए रास्ता भी बना देती है, जैसा हमने बाहुबली के समय देखा था.” उनके मुताबिक भारत में सिनेमा का जुनून हमेशा बना रहेगा और दर्शक हमेशा नई कहानियों का इंतजार करते रहेंगे.

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