खास बातें
- बसु ने बताया, मेरा यह कतई मानना नहीं है कि डीजल की कीमतों पर से नियंत्रण हटाना अपरिहार्य है, यही रुख फिलहाल पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपना रखा है।'
New Delhi: वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि चूंकि मुद्रास्फीति अब भी आरामदायक स्थिति से बाहर है, सरकार इसे देखते हुए वह फिलहाल डीजल की कीमतों पर से नियंत्रण हटाने के लिए पक्ष में नहीं है। सीआईआई के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने बताया, मेरा यह कतई मानना नहीं है कि डीजल की कीमतों पर से नियंत्रण हटाना अपरिहार्य है, यही रुख फिलहाल पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपना रखा है। मुद्रास्फीति की स्थिति को देखते हुए हम इसे :मूल्य पर नियंत्रण हटाना: नहीं चाहते। हालांकि, बसु ने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो डीजल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ाने या तेल कंपनियों को सहायता देना जारी रखने के बीच कोई एक विकल्प चुनना होगा। बसु ने कहा, मैं आपको यह आश्वासन नहीं दे सकता कि यह होगा या नहीं होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कच्चे तेल की कीमतें 115-116 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कब तक रहती हैं। वित्त वर्ष 2011-12 के लिए वित्त मंत्रालय ने 23,640 करोड़ रुपये की तेल सब्सिडी का अनुमान जताया है जो चालू वित्त वर्ष के लिए 38,386 करोड़ रुपये से कम है।