वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो)
नई दिल्ली: दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता 2015 को अध्ययन के लिए संसद की किसी समिति में भेजे जाने की सहमति नहीं बनने के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को विपक्ष पर आर्थिक सुधारों में रोड़ा बनने का आरोप लगाते हुए इस विधेयक पर लोकसभा में चर्चा को आगे बढ़ाया और कहा कि देश आर्थिक सुधारों के लिए अब और इंतजार नहीं कर सकता।
मंत्री ने कहा कि अगर विपक्ष सहमति जताता तो वह संहिता को संसद की एक संयुक्त समिति में भेजने को तैयार थे। उन्होंने यह भी कहा कि किसी महत्वपूर्ण सुधार विधेयक को 'एक समिति से दूसरी समिति' में नहीं ले जाया जाना चाहिए।
कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने विधेयक को एक संयुक्त समिति को भेजने का फैसला किया, लेकिन राज्यसभा में एक विपक्षी दल ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और इस तरह जेटली ने निचले सदन में विधेयक पर चर्चा शुरू कराई।
विधेयक को संसद की एक स्थाई समिति को भेजे जाने की सदस्यों की मांग का उल्लेख करते हुए जेटली ने कहा कि अगर राज्यसभा स्थाई समिति के विचार को खारिज कर देती है और इसे फिर किसी संयुक्त समिति को भेजा जाता है।
जेटली ने इस संबंध में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक का उल्लेख किया जो राज्यसभा में पारित नहीं हो पा रहा है। जीएसटी विधेयक को भी पहले स्थाई समिति ने मंजूर किया था और बाद में उच्च सदन की प्रवर समिति ने इसे मंजूर किया।
उन्होंने कहा, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता 2015 को हम एक समिति में भेजने के लिए तैयार हैं, लेकिन कमेटी-दर-कमेटी भेजने के लिए तैयार नहीं हैं और हम आर्थिक सुधार की प्रक्रिया को ठप नहीं होने देना चाहते। जेटली ने कहा कि जीएसटी के साथ भी यही हुआ और राजनीतिक कारणों से ऐसा हुआ। उन्होंने कहा कि हम इसे संयुक्त समिति में इसलिए भेजना चाहते हैं कि स्थाई समिति की रिपोर्ट को दर्जनों बार चुनौती दिए जाने का दृष्टांत हमारे पास है, जिससे आर्थिक सुधारों में विलंब होता है।