नई दिल्ली:
वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के नए केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने मुद्रास्फीति पर नियंत्रण, अर्थव्यवस्था में निवेशकों के भरोसे को बहाल करने और राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखते हुए वृद्धि को प्रोत्साहित करने का वादा किया है।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी केंद्र सरकार में वित्त तथा रक्षामंत्री बनाए गए अरुण जेटली ने कहा, ''अस्थायी तौर पर मैं रक्षा मंत्रालय का भी जिम्मा संभालूंगा, लेकिन यह मंत्रिमंडल के विस्तार होने तक मात्र अतिरिक्त प्रभार होगा...' उन्होंने उम्मीद जताई कि 'कुछ ही हफ्तों में' मंत्रिपरिषद का विस्तार होने पर रक्षा मंत्रालय को भी पूर्णकालिक मंत्री मिल जाएगा।
वित्तमंत्री के तौर पर अपनी प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए अरुण जेटली ने कहा, ''मुझे पता है, मैं बेहद चुनौतीपूर्ण समय में कार्यभार संभाल रहा हूं, जब भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसा मजबूत करने की जरूरत है...'' उन्होंने कहा, ''हमारी सरकार को जो जनादेश मिला है, उसमें आशा अंतर्निहित है... राजनैतिक बदलाव अपने आप में वैश्विक समुदाय और घरेलू निवेशक दोनों के लिए मजबूत संदेश होता है... मुझे लगता है, अगले दो महीने निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज कर हम इसे आगे बढ़ा सकेंगे...'' वित्तमंत्री ने कहा कि नई सरकार की पूरी नीति अगले कुछ दिनों में जाहिर की जाएगी।
उन्होंने कहा, ''नई सरकार की पूरी नीति के लिए आपको कुछ और दिन इंतजार करना होगा...'' यह पूछने पर कि क्या वह वृद्धि दर की कीमत पर मुद्रास्फीति पर ध्यान देंगे, जेटली ने कहा, संतुलन बिठाने का काम करना होगा। भारत ने कुछ साल तक नौ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज थी, लेकिन वर्ष 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी के बाद इसमें नरमी आई। आर्थिक वृद्धि दर 2012-13 में दशक भर के न्यूनतम स्तर 4.5 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर आ गई। 2013-14 में यह बढ़कर 4.9 प्रतिशत हो गई।, जबकि चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।