यह ख़बर 29 नवंबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

नगद सब्सिडी की योजना पर भी उठने लगे सवाल

खास बातें

  • 2013 तक सरकार करोड़ों लोगों के अकाउंट में कुल मिलाकर तीन लाख 17 हजार करोड़ रुपये डाल देना चाहती है। यह पैसा बाकायदा माइक्रो एटीएम मशीनों के जरिये लोगों के घर तक पहुंचाया जाएगा।
नई दिल्ली:

2013 तक सरकार करोड़ों लोगों के अकाउंट में कुल मिलाकर तीन लाख 17 हजार करोड़ रुपये डाल देना चाहती है। यह पैसा बाकायदा माइक्रो एटीएम मशीनों के जरिये लोगों के घर तक पहुंचाया जाएगा। लेकिन, इस योजना पर जानकार सवाल भी उठा रहे हैं।

दिल्ली के जंतर−मंतर में बैठी जन-संसद के बीच भी सब्सिडी के बदले नगद योजना पर बहस दिख रही है।

कोई 'कैश नहीं, कैरोसिन चाहिए' का नारे लगा रहा है, इस डर से कि भारत सरकार की बड़ी योजनाओं से उसे जो फायदा अभी मिल रहा है, वह कहीं नई व्यवस्था के लागू होने से उससे छिन न जाए, तो कोई सरकार की मौजदा योजनाओं का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं उनमें ये उम्मीद जगी है कि नई कैश ट्रांसफर की व्यवस्था से उनका भविष्य बदलेगा।

फिलहाल सरकार की तैयारी इस नई योजना से बिचौलियों को दूर रखने की है। इसके लिए बड़े इंतज़ाम किए गए हैं। ज़रूरतमंदों तक पैसा उनके घर तक पहुंचाने के लिए सरकार ने कैश ट्रांसफर की तैयारी की है।
इसके लिए 20 लाख माइक्रो एटीएम मुहैया कराए जाएंगे। बैंक से घर तक पैसा पहुंचाने के लिए बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट होंगे। अब महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप, आशा वर्कर, स्कूल शिक्षकों को भी इस काम में लगाने का फैसला लिया गया है।
इन लोगों को इस काम के लिए विशेष भत्ता भी दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इस तरह सरकार इस काम में बैंकों का एकाधिकार तोड़ना चाहती है।

सरकार इस नई व्यवस्था के जरिये 3.17 लाख करोड़ रुपया सीधे करोड़ों ज़रूरतमंदों तक पहुंचाना चाहती है लेकिन, इस योजना को शुरू करने से पहले सरकार को सभी पिछड़े और दूर−दराज़ के इलाकों में बैंकिंग की व्यवस्था पहुंचानी होगी जिससे समय पर भुगतान हो सके।

सामाजिक संगठनों से जुड़े और जानकार लोग इतने बड़े तामझाम पर सवाल उठा रहे हैं। निखिल डे का दावा है कि सरकार मौजूदा व्यवस्था के जरिये गरीबों तक योजनाओं का फायदा नहीं पहुंचा पाई। इसलिए नई व्यवस्था लाकर अपनी विफलता को छिपाना चाहती है। जबकि आईआईटी की अर्थशास्त्री रितिका खेड़ा सवाल उठा रही हैं कि कोट कासिम में इस नई योजना के पायलट प्रोजेक्ट के दौरान ज़रूरतमंदों तक फायदा पहुंचाने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम रहा।

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हालांकि सरकार इस फैसले को 1 जनवरी से 51 ज़िलों में लागू करने की तैयारी में जुट गई है। फिलहाल जो 29 योजनाएं अभी शामिल हैं उनमें कैश ट्रांसफर की तैयारी, स्कॉलरशिप, बुढ़ापे का पेंशन, रसोई गैस और मिट्टी तेल भी हैं। लेकिन, इस नई योजना के दायरे से अनाज और खाद सब्सिडी के साथ−साथ नरेगा भी बाहर है।