खास बातें
- यह कार्रवाई शनिवार को एयर इंडिया के एक पायलट की गिरफ्तारी के बाद शुरू की गई। उनपर फर्जी अंकपत्र के सहारे लाइसेंस हासिल करने का आरोप है।
नई दिल्ली: कई पायलटों पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे विमान उड़ाने का लाइसेंस लेने का आरोप लगने के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) पायलटों को पिछले एक साल में जारी करीब 4,000 लाइसेंसों की जांच कर रहा है। डीजीसीए के प्रमुख भारत भूषण ने कहा, "लाइसेंस के लिए पायलटों द्वारा फर्जी अंकपत्र देना एक बड़ी समस्या है। हम पिछले एक साल में जारी सभी पायलट लाइसेंस की जांच करेंगे। इनकी संख्या तीन से चार हजार के बीच है।" यह कार्रवाई शनिवार को एयर इंडिया के पायलट जेके वर्मा की गिरफ्तारी के बाद शुरू की गई। उन पर फर्जी अंकपत्र के सहारे पायलट लाइसेंस हासिल करने का आरोप है। पिछले एक सप्ताह में यह इस तरह की दूसरी गिरफ्तारी है। ऐसे ही एक अन्य मामले में सबसे पहले इंडिगो की पायलट परमिंदर गुलाटी (38) को गिरफ्तार किया गया था। उन पर भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट्स लाइसेंस (एएलटीपी) हासिल करने का आरोप है। पुलिस आयुक्त (अपराध शाखा) अशोक चांद ने सोमवार को कहा, "हमने वर्मा को गिरफ्तार किया है। इस मामले में जांच जारी है। हमें डीजीसीए से और भी कई नाम मिले हैं। हमें दो अन्य पायलट- इंडिगो की मीनाक्षी सहगल और एमडीएलआर के स्वर्ण सिंह तलवार के खिलाफ शिकायत मिली है। इन पर भी फर्जी दस्तावेजों के सहारे लाइसेंस हासिल करने का संदेह है।" दोनों फिलहाल फरार हैं। भूषण ने कहा, "गुलाटी के मामले में उनके विमान उतारने की तकनीक में कुछ खामी थी। हमने उनके रिकॉर्ड की जांच की तो यह चौंकाने वाला था। उन्होंने फर्जी अंकपत्र के सहारे लाइसेंस हासिल किया था, जिसकी पुष्टि नहीं की गई थी।" उन्होंने कहा, "इसी तरह के कुछ अन्य मामलों को लेकर संदेह पैदा होने के बाद डीजीसीए ने उनकी जांच करवाई तो ऐसे कई और मामले सामने आए। जांच जारी है। अब तक ऐसे चार मामले सामने आए हैं, जिनमें से दो- गुलाटी और वर्मा- की गिरफ्तारी हो चुकी है।"