खाद्य तेल की कीमतों में गिरावट का असर चौथी तिमाही में सबसे तेज रहा है. इसकी एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसारमार्च को समाप्त तिमाही में 'फॉर्च्यून' ब्रांड के मालिक का लाभ 60 प्रतिशत गिरकर 93.61 करोड़ रुपये हो गया. इसकी तुलना ब्लूमबर्ग द्वारा ट्रैक किए गए विश्लेषकों के 281.3 करोड़ रुपये के आम सहमति (consensus estimate) अनुमान से की जाती है. कंपनी ने कहा कि तिमाही के दौरान कई कारकों के लाभ को प्रभावित किया है .
इन कारणों में खाद्य तेल की कीमतों में गिरावट, जिसके कारण उच्च लागत वाली इन्वेंट्री, टैरिफ दर कोटा असमानता जिसने सोयाबीन तेल मार्जिन पर दबाव डाला; रसद और पैकेजिंग लागत में बढ़ोतरी; और फेड दरों में बढ़ोतरी के पीछे ऊंची लागत शामिल है. इसके अलावा, बांग्लादेश में इसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ने Q4 में 12 करोड़ रुपये का नुकसान किया. इसके पीछे खाद्य तेलों, स्थानीय मुद्रा से संबंधित मुद्दे और विदेशी मुद्रा हेजिंग के लिए काउंटर-पार्टी की अनुपलब्धता, सरकार द्वारा मूल्य कैप प्रमुख कारण रहे.
अदाणी विल्मर Q4 हाइलाइट्स (YoY)
- 16,011.7 करोड़ रुपये के अनुमान की तुलना में परिचालन से राजस्व 7 प्रतिशत घटकर 13,872.6 करोड़ रुपये रह गया.
- 533.2 करोड़ रुपये के पूर्वानुमान के मुकाबले ऑपरेटिंग प्रॉफिट 16 प्रतिशत गिरकर 358.77 करोड़ रुपये हो गया.
- मार्जिन 2.6% बनाम 2.9% रहा. विश्लेषकों ने मीट्रिक को 3.3% पर अनुमानित किया था.
- खाद्य तेल कारोबार से राजस्व 12.78% गिरकर 10,790 करोड़ रुपये हो गया, जबकि वॉल्यूम 0.88 मिलियन मीट्रिक टन पर स्थिर रहा.
- खाद्य व्यवसाय का राजस्व 53% बढ़कर 1,159 करोड़ रुपये हो गया, जबकि वॉल्यूम 38.8% बढ़कर 0.25 मिलियन मीट्रिक टन हो गया.
- पिछले वर्ष की तुलना में 55% की मात्रा में वृद्धि के साथ उद्योग के आवश्यक खंड में राजस्व में 7.6% की वृद्धि हुई और यह 1,924 करोड़ रुपये हो गया.
- कंपनी ने पिछली तिमाही में 16% की तुलना में तिमाही के दौरान 15% की वॉल्यूम वृद्धि दर्ज की.
कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंशु मलिक ने कहा, "तिमाही और पूरे वर्ष के दौरान हमारा मार्जिन खाद्य तेल की कीमतों में गिरावट के माहौल में उच्च लागत वाली इन्वेंट्री से प्रभावित हुआ, परिचालन लागत पर मुद्रास्फीति का प्रभाव और ब्याज लागत में हुई वृद्धि के कारण भी हम पर असर पड़ा."
हालांकि, अदाणी विल्मर वार्षिक आधार पर अपनी बिक्री बढ़ाने में सक्षम रहा है, जिसने संबंधित बाजार में उत्पादों की बिक्री को बढ़ाने की पूरी कोशिश की. FY23 में, कंपनी ने बिक्री के पांच मिलियन मीट्रिक टन के मील के पत्थर को पार कर लिया है.
खाद्य व्यवसाय के संदर्भ में, मलिक ने कहा कि इसने वित्तीय वर्ष 2023 में 4,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है. यह मूल्य की दृष्टि से 55% अधिक है और पिछले वर्ष की तुलना में 39% की वॉल्यूम में वृद्धि हुई है. गेहूं के आटे और चावल दोनों व्यवसायों में वित्त वर्ष के दौरान राजस्व में 1,000 करोड़ रुपये को पार कर लिया गया है.
कंपनी को उम्मीद है कि किचन एसेंशियल प्रोडक्ट्स सेगमेंट में बड़ी मांग को देखते हुए दोनों उत्पादों में वृद्धि कई वर्षों तक जारी रहेगी. कंपनी के अनुसार, "पहली छमाही में खाद्य कीमतों में भी उच्च मुद्रास्फीति देखी गई, जो दूसरी छमाही में कम होने लगी."
कंपनी ने कहा कि ई-कॉमर्स, आधुनिक व्यापार और सामान्य व्यापार की सेवा करने वाले ई-बी2बी जैसे वैकल्पिक चैनल तेजी से बढ़ रहे हैं. FY23 में, इसने तेल और खाद्य पदार्थों के संयुक्त पोर्टफोलियो में 23% की वृद्धि हुई है. साल के दौरान इन चैनलों ने बिक्री में 2,700 करोड़ रुपये का योगदान दिया है.
कंपनी होटल, रेस्तरां और कैटरिंग उद्योग के साथ-साथ निर्यात में संभावनाएं देखती है और इन अवसरों का फायदा उठाने की योजना पर काम कर रही है.
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