खास बातें
- चार विदेशी कम्पनियों समेत छह रक्षा कम्पनियों पर सोमवार को 10 साल तक देश में कारोबार करने पर रोक लगा दी गई।
नई दिल्ली: चार विदेशी कम्पनियों समेत छह रक्षा कम्पनियों पर सोमवार को 10 साल तक देश में कारोबार करने पर रोक लगा दी गई।
कम्पनियों पर एक रिश्वत मामले से सम्बंधित होने के कारण रोक लगाई गई, जिसमें आर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) के एक पूर्व प्रमुख को आरोपी बनाया गया है।
सिंगापुर टेक्नोलॉजीज कायनेटिक्स, इस्रायली मिलिटरी इंडस्ट्रीज, जर्मनी की रेनमेटल एयर डिफेंस और कारपोरेशन डिफेंस रसिया तथा दो भारतीय कम्पनियों पर ओएफबी, रक्षा उत्पादन विभाग तथा रक्षा मंत्रालय से कारोबार करने पर रोक लगा दी गई।
प्रतिबंधित भारतीय कम्पनियों में हैं नई दिल्ली की कम्पनी टीएस किशन एंड कम्पनी प्राइवेट लिमिटेड तथा लुधियाना की कम्पनी आरके मशीन टूल्स लिमिटेड।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सितांशु कार ने एक आधिकारिक बयान में कहा, "रक्षा मंत्रालय ने आज (सोमवार) छह कम्पनियों पर ओएफबी, रक्षा उत्पादन विभाग तथा रक्षा मंत्रालय से कारोबार करने पर 10 साल के लिए रोक लगाने का फैसला किया।"
यह कदम केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा ओएफबी के पूर्व प्रमुख सुदीप्तो घोष को आरोपी बनाए जाने तथा जांच एजेंसी द्वारा कम्पनियों को काली सूची में डालने की सिफारिश करने के बाद उठाया गया। जांच एजेंसी ने जून 2010 में घोष तथा कई अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
कार ने कहा कि कम्पनियों को नोटिस भेजकर पूछा गया था कि घोष तथा अन्य के रिश्वत से सम्बंधित मामले में आरोप पत्र दाखिल किये जाने के बाद इन कम्पनियों के खिलाफ कदम क्यों नहीं उठाया जाना चाहिए।
कार ने कहा कि कम्पनियों से मिले जवाबों पर विचार करने के बाद आज उन्हें प्रतिबंधित करने का फैसला किया गया।