नाना पाटेकर के व्यक्तित्व को कोई एक शब्द परिभाषित नहीं कर सकता. कोई उन्हें साफदिल मानता है कोई बहुमुखी तो कोई तुनक मिजाज, गुस्सैल और मुंहफट. उनकी शख्सियत के तमाम रूप अक्सर सार्वजनिक तौर पर नजर आते थे. कुछेक बार अपने गुस्सैल स्वभाव के कारण वे मुसीबत में भी फंसे. ऐसा ही एक वाक्या मई 2005 में हुआ. बडे पर्दे पर कई बार पुलिस अफसर का किरदार निभा चुके पाटेकर खुद एक आरोपी की तरह पुलिस के चंगुल में फंस गये. 13 मई 2005 की शाम नाना पाटेकर से मेरी मुलाकात फोर्ट एस्प्लेनेड मेंशन में वकील नीलेश पावस्कर के दफ्तर में हुई. नाना पाटेकर को गिरफ्तारी का डर सता रहा था और वे अग्रिम जमानत की अर्जी पर चर्चा करने के लिये वकील पावस्कर के पास आये थे. दरअसल एक शाम पहले रोड रेज के मामले पर उनकी एक उद्योगपति से भिड़ंत हो गयी थी और पाटेकर ने कथित रूप से उस कारोबारी पर अपनी रिवॉल्वर तान दी थी. कारोबारी ने पुलिस के पास एफआईआर दर्ज करा दी.
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक 12 मई की शाम करीब साढ़े चार बजे घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड पर कारोबारी उत्कर्ष मोरारका की स्कॉर्पियो उस मित्शीबुशी कार से घिस गयी जिसमें नाना पाटेकर सवार थे. इसके बाद नाना पाटेकर ने मोरारका का पीछा किया और वाशी टोल नाके पर उसे रोका. मोरारका के मुताबिक इसके बाद पाटेकर ने उनके साथ गाली गलौच की, उनको थप्पड मारे और अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर उन पर तानते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी.
यह भी पढ़ें | नाना पाटेकर ने पहले ही कर ली थी मौत की तैयारी, फार्महाउस पर रखी थी सूखी लकड़ियां, करीबी देख कर रह गया था हैरान
वकील के दफ्तर में बैठे पाटेकर के चेहरे पर गिरफ्तारी का डर साफ झलक रहा था, जिसे वे बात करते वक्त मुस्कराकर छुपाने की कोशिश कर रहे थे. पाटेकर ने मुझे और साथ मौजूद दो दूसरे पत्रकारों को बताया कि उन पर लगाये गये आरोप झूठे हैं. उनके मुताबिक मोरारका ने बार बार उनकी कार को टक्कर मारी और जब वाशी टोल नाके पर उनका मोरारका से आमना-सामना हुआ तो मोरारका ने उनको थप्पड मारा. पाटेकर का कहना था कि मोरारका ने लापरवाही से गाडी चलाकर उनकी जान लेने की कोशिश की.
पाटेकर की ओर से वकील पावस्कर ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की. हाई कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देते हुए सेशंस कोर्ट से अग्रिम जमानत लेने के लिये कहा. सेशंस कोर्ट ने उन्हें जमानत तो दे दी लेकिन साथ ही पूछताछ के लिये देवनार पुलिस थाने में हाजिर होने को कहा जहां उनके खिलाफ मामला दर्ज हुए था. पाटेकर जेल जाने से बच गये. करीब दो साल बाद पाटेकर और मोरारका में समझौता हो गया. जनवरी 2007 में मोरारका ने अदालत से कहा कि वे मामले को आगे नहीं घसीटना चाहते. इसके बाद मुंबई पुलिस ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी और पाटेकर के सिर से आपराधिक मामले की लटकती तलवार हट गयी.
पाटेकर भले ही पुलिस के लॉकअप में सरकारी मेहमान बनने से बच गये हों लेकिन पिछले साल उनसे आखिरी मुलाकात एक पुलिस अधिकारी के कार्यक्रम में ही हुई जहां वे मुख्य अतिथि थे. जूहू इलाके के एक पब में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने अंडरवर्ल्ड पर अपनी किताब “व्हेन इट आल बिगैन' का लोकार्पण उनके के हाथों से करवाया था. पाटेकर ने 2013 में रामगोपाल वर्मा की फिल्म द अटैक्स ऑफ 26-11 में राकेश मारिया का किरदार अदा किया था जो कि तब क्राइम ब्रांच के प्रमुख थे.
यह भी पढ़ें | अमिताभ बच्चन ने शेयर किया NDTV से नाना पाटेकर के इंटरव्यू का वीडियो, नाना ने सुनाई थी बिग बी के स्टारडम की कहा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं