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पिता के निधन से टूटे ये सिंगर, अब उनकी याद में बनाएंगे गाना, अमिताभ बच्चन की फिल्म में भी दे चुके हैं आवाज

वरदान सिंह इस समय अपनी जिंदगी के बेहद भावुक और मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. हाल ही में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार में शोक का माहौल है. पिता को खोने के इस गहरे दुख के बीच वरदान सिंह ने अब उनकी यादों को हमेशा के लिए संगीत में संजोने का फैसला किया है.

पिता के निधन से टूटे ये सिंगर, अब उनकी याद में बनाएंगे गाना, अमिताभ बच्चन की फिल्म में भी दे चुके हैं आवाज
वरदान सिंह पिता की याद में बनाएंगे गाना

गायक और संगीतकार वरदान सिंह (Vardan Singh) इस समय अपनी जिंदगी के बेहद भावुक और मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. हाल ही में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार में शोक का माहौल है. पिता को खोने के इस गहरे दुख के बीच वरदान सिंह ने अब उनकी यादों को हमेशा के लिए संगीत में संजोने का फैसला किया है. वह अपने पिता की स्मृति में एक खास गाना तैयार करेंगे. करीब दो दशकों से संगीत की दुनिया से जुड़े वरदान के लिए यह महज एक और गाना नहीं होगा.

फिल्मों के लिए गाने, संगीत और पार्श्व संगीत तैयार कर चुके वरदान अब पहली बार अपने जीवन के इतने निजी दुख और पिता से जुड़ी यादों को एक धुन में पिरोने की तैयारी कर रहे हैं. इस गाने के जरिए वह पिता-पुत्र के रिश्ते, उनके साथ बिताए पलों और उनके जाने के बाद जिंदगी में आए खालीपन को संगीत में उतारना चाहते हैं.

पिता की यादों को गाने में संजोएंगे वरदान सिंह

किसी अपने को खोने के बाद हर व्यक्ति अपने दुख को अलग-अलग तरीके से व्यक्त करता है. एक संगीतकार के लिए शायद उसकी धुनें और शब्द ही उसकी भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे स्वाभाविक माध्यम होते हैं. वरदान सिंह भी पिता के निधन के बाद अपनी भावनाओं को संगीत का रूप देना चाहते हैं. पिता के साथ बिताए पुराने पल, उनसे मिली सीख और जिंदगी की वे छोटी-बड़ी यादें, जिन्हें आमतौर पर शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है, इस गाने की भावनात्मक बुनियाद बन सकती हैं.

यह गाना किसी फिल्म की कहानी या किसी काल्पनिक किरदार की भावनाओं पर आधारित नहीं होगा, बल्कि इसके पीछे वरदान की अपनी जिंदगी और पिता को खोने का व्यक्तिगत अनुभव होगा. फिलहाल गाने का नाम, इसके बोल और इसे जारी करने की तारीख तय नहीं हुई है. हालांकि वरदान इसे अपने पिता के लिए एक बेहद निजी श्रद्धांजलि के रूप में तैयार करना चाहते हैं.

‘कर्मा धर्मा' से ‘कभी यूं भी' तक, लंबा रहा है संगीत का सफर

वरदान सिंह लंबे समय से हिंदी फिल्म संगीत से जुड़े हुए हैं. गायक और संगीतकार होने के साथ-साथ उन्होंने कई फिल्मों के पार्श्व संगीत और थीम पर भी काम किया है. राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘रक्त चरित्र' में वरदान ने बतौर गायक ‘कर्मा धर्मा' गाना गाया था. अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘रण' के गाने ‘सिक्कों की भूख' में भी उन्होंने अपनी आवाज दी. बाद में ‘इश्क जुनून' का रोमांटिक गाना ‘कभी यूं भी' उनके चर्चित कामों में शामिल हुआ. इस गाने में गायकी के साथ संगीत भी वरदान सिंह ने दिया था. उनका काम केवल इन गानों तक सीमित नहीं रहा. उनके फिल्मी सफर में ‘ऑल इज वेल', ‘चार दिन की चांदनी', ‘यमला पगला दीवाना', ‘मैं और मिसेज खन्ना', ‘हीरोज', ‘काफिला', ‘अपना सपना मनी मनी' और ‘शादी से पहले' जैसी फिल्मों के पार्श्व संगीत और थीम से जुड़े काम भी शामिल रहे हैं.

वहीं संगीतकार के तौर पर उनका सफर अब भी जारी है. ‘कुल्ली: द पावर ऑफ डेविल' और ‘एक नई शुरुआत' जैसे आगामी प्रोजेक्ट भी उनके संगीतकार के रूप में काम का हिस्सा हैं. फिल्मी संगीत के अलावा वरदान ने स्वतंत्र और भक्ति संगीत में भी लगातार काम किया है. इतने वर्षों तक अलग-अलग भावनाओं और कहानियों को संगीत देने वाले वरदान के लिए अब पिता की याद में बनने वाला यह गाना उनके अब तक के सबसे निजी कामों में से एक हो सकता है.

चकाचौंध से दूर रहा पिता-बेटे का रिश्ता

वरदान सिंह के पिता मनोरंजन जगत की चकाचौंध से दूर रहे, लेकिन बेटे की जिंदगी में उनकी जगह बेहद खास थी. आमतौर पर किसी कलाकार की सफलता दुनिया के सामने होती है, लेकिन उस सफलता के पीछे मौजूद परिवार की भूमिका कम ही दिखाई देती है. दर्शक कलाकार के गाने सुनते हैं, उसकी उपलब्धियां देखते हैं, लेकिन उसके संघर्ष के दिनों में परिवार के साथ हुई बातचीत, मुश्किल फैसले और उसके पीछे खड़े लोगों की कहानियां अक्सर निजी ही रह जाती हैं. वरदान और उनके पिता का रिश्ता भी अब तक उनकी जिंदगी का ऐसा ही निजी हिस्सा रहा.

पिता के निधन के बाद अब वरदान उन्हीं यादों को अपने संगीत में जगह देना चाहते हैं, ताकि उनके साथ बिताए पलों और उनसे मिली सीख को एक ऐसी धुन में संजोया जा सके जो हमेशा उनके साथ रहे. इस बार किसी फिल्म के लिए नहीं, अपने पिता के लिए बनेगा गाना. वरदान सिंह के इस फैसले की सबसे भावुक बात यही है कि वर्षों तक दूसरे किरदारों, कहानियों और परिस्थितियों के लिए संगीत तैयार करने के बाद इस बार उनकी धुन के पीछे उनकी अपनी जिंदगी की कहानी होगी.

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