भारतीय सिनेमा में ऐसी कई फिल्में आई हैं जो किसी ना किसी उपन्यास पर बनी हैं. उन्हीं में से एक फिल्म के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं. हम बात कर रहे हैं साल 2003 में आई फिल्म पिंजर के बारे में. इस फिल्म को चंद्रप्रकाष द्विवेदी ने डायरेक्ट किया है. बता दें कि यह फिल्म मशहूर लेखक अमृता प्रीतम के पंजाबी में लिखे उपन्यास पर बनी है जिसकी नाम पिंजर ही है. यह फिल्म 1947 के विभाजन के समय की है. इस फिल्म में उर्मिला मातोंडकर और मनोज वाजपेयी मुख्य भूमिका में नजर आए हैं. इस फिल्म के माध्यम से 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी, सामाजिक सोच और इंसानी रिश्तों की गहराई को बेहद संवेदनशील ढंग से पर्दे पर उतारा गया है. आइए जानते हैं इस फिल्म के बारे में और भी कई बातें-
पिंजर की कहानी
फिल्म की कहानी 1947 के विभाजन से पहले शुरू होती है. उर्मिला मातोंडकर ने इस फिल्म में पूरो का किरदार निभाया है जो एक खुशहाल हिंदू परिवार की बेटी है जिसकी शादी रामचंद्र से तय हो चुकी होती है. सब कुछ ठीक चल रहा होता है लेकिन तभी उसकी जिंदगी एक ऐसा मोड़ लेती है जो सब कुछ बदल देता है. पूरो का अपहरण रशीद जिसका किरदार मनोज वाजपेयी ने निभाया है कर लेता है. इसके पीछे कोई पर्सनल दुश्मनी नहीं बल्कि दोनों परिवारों के बीच चली आ रही पीढ़ियों पुरानी रंजिश होती है. रशीद के परिवार के साथ पहले अन्याय हुआ था और उसी का बदला लेने के लिए पूरो को अगवा किया जाता है.
रशीद कभी भी पूरो के साथ बुरा बर्ताव नहीं करता. वह उसका सम्मान करता है और चाहता है कि वह सेफ रहे. मौका मिलने पर पूरो अपने घर भाग जाती है लेकिन उसके अपने ही माता-पिता समाज और इज्जत के डर से उसे अपनाने से इनकार कर देते हैं. यह पल फिल्म का सबसे भावुक और दर्दनाक हिस्सा बन जाता है.निराश होकर पूरो वापस रशीद के पास लौट आती है. समय के साथ उसका नाम हमीदा रख दिया जाता है और दोनों एक बच्चे को गोद लेकर नई जिंदगी शुरू करते हैं. धीरे-धीरे रशीद का सच्चा स्वभाव और उसका अच्छा व्यवहार पूरो के मन में उसके लिए विश्वास पैदा करता है.
इसी बीच देश का विभाजन हो जाता है और चारों ओर दंगे फैल जाते हैं. रामचंद्र का परिवार भारत की ओर निकल जाता है लेकिन उसकी बहन लाजो का अपहरण हो जाता है. पूरो, रशीद की मदद से लाजो को खोज निकालती है और सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचा देती है. अंत में रामचंद्र पूरो से कहता है कि वह उसके साथ नई जिंदगी शुरू कर सकती है. लेकिन पूरो इसे ठुकरा देती है. वह समझ चुकी होती है कि जिसने कठिन समय में उसका साथ दिया वही उसका सच्चा जीवनसाथी है. वह रशीद को स्वीकार कर उसके साथ रहने का फैसला करती है.
फिल्म की स्टारकास्ट और बजट
इस फिल्म में उर्मिला मातोंडकर और मनोज वाजपेयी के साथ ही संजय सूरी ईशा कोपिकर, कुलभूषण खरबंदा, फरीदा ज़लाल, संदली सिन्हा, प्रियांशु चटर्जी ने भी काम किया था. 12 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 6 करोड़ की कमाई की थी. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म फ्लॉप साबित हुई थी. साथ ही फिल्म को लेकर कई तरह के विवाद भी सामने आए थे. हालांकि फिल्म चर्चा में रही और आज भी लोग इसे देखना पसंद करते हैं. इस फिल्म में उत्तम सिंह ने अपना म्यूजिक दिया था. बता दें कि इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला है.
पिंजर का गाना
2003 में आई पिंजर में वैसे तो कई खूबसूरत गाने हैं. जिनके बोल गुलजार और अमृता प्रीतम द्वारा लिखे गए हैं. लेकिन हम जिस गाने की बात कर रहे हैं वह है, "शबा नी शबा". इसे उदित नारायण, कविता कृष्णमूर्ति और साधना सरगम ने गाया है. यह अभिनेत्री संदली सिन्हा पर फिल्माया गया है. इस गाने को उत्तम सिंह ने संगीतबद्ध किया था. यह बेहद खूबसूरत गाना है और शादी ब्याह में खूब बजता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं