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58 साल पुराना वो गाना जो ससुराल में सुखी हर लड़की का है फेवरिट, बाबुल के प्यार में भूली पिया का घर, लता की खुशनुमा आवाज ने बनाया सदाबहार

58 साल पहले रिलीज हुआ ‘मैं तो भूल चली बाबुल का देश’ आज भी शादी के बाद नई जिंदगी की खुशियों को बयां करने वाले सबसे पसंदीदा गीतों में गिना जाता है. लता मंगेशकर की सुरीली आवाज और नूतन पर फिल्माया गया यह गीत आज भी दिलों को छू जाता है.

58 साल पुराना वो गाना जो ससुराल में सुखी हर लड़की का है फेवरिट, बाबुल के प्यार में भूली पिया का घर, लता की खुशनुमा आवाज ने बनाया सदाबहार
हर सुखी लड़की अपने ससुराल में जरूर गाती है ये गाना

1968 में आई फिल्म ‘सरस्वतीचंद्र' का गाना ‘मैं तो भूल चली बाबुल का देश' आज भी शादी और ससुराल से जुड़े भावों को बेहद खूबसूरती से बयां करता है. गाने में एक नई-नवेली दुल्हन अपने मायके को याद करते हुए कहती है कि अब उसे पिया का घर प्यारा लगने लगा है. यह गाना लता मंगेशकर ने गाया था. इसके बोल इंदीवर ने लिखे थे. संगीत कल्याणजी-आनंदजी ने दिया था. फिल्म में यह गीत नूतन पर फिल्माया गया था. करीब 58 साल बाद भी इसकी मिठास कम नहीं हुई है. इसकी सरल भाषा और खुशमिजाज धुन इसे आज भी खास बनाती है. 

ननद में बहन और सास में मां की तस्वीर

इस गाने की सबसे खास बात इसके बोल हैं. इसमें एक लड़की अपने नए घर को अपनाने की खुशी जाहिर करती है. वह कहती है कि उसे ननद में अपनी बहन की झलक दिखाई देती है. सास उसे ममता की मूर्ति लगती हैं. ससुर में उसे पिता जैसी छवि नजर आती है. यानी शादी के बाद लड़की के लिए ससुराल सिर्फ एक नया घर नहीं रहता. वह धीरे-धीरे उसी घर में अपने रिश्ते तलाशने लगती है. यही भाव गाने को बेहद प्यारा बनाता है.

लता की आवाज ने गीत में भर दी खुशी

‘मैं तो भूल चली बाबुल का देश' को लता मंगेशकर ने अपनी सुरीली आवाज दी. गाने के संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी थे. गीतकार इंदीवर ने बहुत आसान शब्दों में एक लड़की के मन की बात लिखी. गाने की धुन में लोक संगीत की खुशबू भी महसूस होती है. एक पुराने संगीत-संग्रह में इसे गुजरात के लोक नृत्य पर आधारित गीत बताया गया है. यही वजह है कि इसकी धुन में एक अलग तरह की चंचलता और उत्साह सुनाई देता है. 

इस गीत की खूबसूरती यह है कि इसमें विदाई का दुख नहीं है. इसके बजाय नई जिंदगी को लेकर उत्साह है. लड़की अपने मायके से दूर जाने के बाद भी खुश है. उसे अपने पति का साथ सबसे ज्यादा प्यारा लगता है.

‘सरस्वतीचंद्र' के संगीत की बनी खास पहचान

‘सरस्वतीचंद्र' साल 1968 में रिलीज हुई थी. फिल्म का निर्देशन गोविंद सरैया ने किया था. इसमें नूतन और मनीष मुख्य भूमिकाओं में थे. फिल्म प्रसिद्ध गुजराती उपन्यासकार गोवर्धनराम माधवराम त्रिपाठी के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित थी.  फिल्म का संगीत कल्याणजी-आनंदजी ने तैयार किया था. इसके गीतों में ‘चंदन सा बदन', ‘छोड़ दे सारी दुनिया' और ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में' जैसे यादगार गाने भी शामिल थे. ‘सरस्वतीचंद्र' के संगीत को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था. 

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‘मैं तो भूल चली बाबुल का देश' इसी शानदार संगीत का हिस्सा था. आज भी जब शादी के बाद नए घर में बसने वाली लड़की की बात होती है, तो इस गीत के बोल दिल को छू जाते हैं. शायद यही वजह है कि 58 साल बाद भी लता की आवाज में गाया यह गीत अपनी मिठास और खुशी के साथ लोगों के बीच जिंदा है.

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